इंदौर-महेश्वर में 150 करोड़ से बनेगा अहिल्या लोक

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इंदौर-महेश्वर में 150 करोड़ से बनेगा अहिल्या लोक

इंदौर और महेश्वर में अहिल्या लोक के रूप में नई पहचान

मध्यप्रदेश में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की स्मृति को भव्य रूप से संरक्षित और प्रदर्शित करने के लिए इंदौर और महेश्वर में दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली ये परियोजनाएं धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय विकास को नई दिशा देंगी।

इंदौर में अहिल्याबाई होल्कर स्मारक का निर्माण

इंदौर में महू नाके के पहले, लालबाग के पीछे स्थित पुराने आरटीओ भवन परिसर और उससे लगी खाली भूमि पर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का आधुनिक स्मारक विकसित किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 110 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है, जिसमें पहले चरण के लिए 40 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

पुराने आरटीओ भवन के हॉल और अन्य संरचनाओं को तोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें संरक्षित रखते हुए आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। स्मारक में थ्री-डी प्रोजेक्शन, लाइट एंड साउंड शो, चित्रों और दृश्य प्रस्तुतियों के माध्यम से लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन, उनके शासन, धार्मिक कार्यों और आदर्शों को विस्तार से दिखाया जाएगा।

स्मारक की संरचना और जनसहभागिता

इंदौर में बनने वाले स्मारक के लिए गठित स्मारक प्रतिष्ठा की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन कर रही हैं। उन्होंने इंदौर के राजवाड़ा पर आयोजित कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष इस परियोजना का विस्तृत प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया था।

परियोजना की अनुमानित कुल लागत करीब 100 से 110 करोड़ रुपए बताई गई है। समाजसेवी रामस्वरूप मूंदड़ा के अनुसार पहले चरण के लिए 40 करोड़ रुपए स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसी के साथ इंदौर के उद्योगपति और दानवीर विनोद अग्रवाल ने इस स्मारक के लिए 5 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की है, जिससे परियोजना को अतिरिक्त बल मिलेगा।

महेश्वर में महाकाल लोक की तर्ज पर अहिल्या लोक

इंदौर के साथ-साथ महेश्वर में भी उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर अहिल्या लोक विकसित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के माध्यम से लगभग 110 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाएगा। राज्य कैबिनेट इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है और अब टेंडर सहित अन्य प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।

नर्मदा नदी के तट पर प्रस्तावित अहिल्या लोक के लिए लगभग 15 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। यहां पूरे नर्मदा तट का समग्र विकास किया जाएगा, जिसमें घाटों और प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार भी शामिल है। साथ ही लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा।

तीन चरणों में होगा विकास

अहिल्या लोक परियोजना को तीन हिस्सों में विकसित करने की योजना है। पहले हिस्से में लोकमाता अहिल्याबाई की जीवनगाथा, उनके प्रेरक प्रसंग, इंदौर आगमन, विवाह, शौर्य, सुशासन और आध्यात्मिक कार्यों को समग्र रूप से दिखाया जाएगा। इसके लिए एक विशेष फिल्म भी तैयार की जाएगी, जिसे पर्यटक और श्रद्धालु वहां देख सकेंगे।

दूसरे और तीसरे चरण में महेश्वर के प्राचीन म्यूजियम का जीर्णोद्धार, बाग-बगीचों का विकास, माता अहिल्या की गादी, उनके द्वारा निर्मित शिव मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों का संरक्षण और नवीनीकरण किया जाएगा। साथ ही महेश्वर की प्रसिद्ध बुनकर कला को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें महेश्वरी साड़ियों और पारंपरिक वस्त्रों की ब्रांडिंग और प्रदर्शन की विशेष व्यवस्था होगी।

पर्यटन और सिंहस्थ को ध्यान में रखकर लक्ष्य

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ से पहले अहिल्या लोक का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु उज्जैन के साथ-साथ ओंकारेश्वर और महेश्वर भी आसानी से पहुंच सकें। महाकाल लोक की तरह यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना जताई जा रही है।

इन परियोजनाओं से न केवल लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के इतिहास और योगदान को नई पीढ़ी के सामने जीवंत रूप में रखा जाएगा, बल्कि इंदौर और महेश्वर को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी नई पहचान मिलेगी। स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और परंपरागत हस्तशिल्प को भी इससे सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

अंततः इंदौर और महेश्वर में विकसित हो रहे अहिल्या लोक और स्मारक, मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ पर्यटन के नए द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण होने पर यह क्षेत्र श्रद्धालुओं, पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

Sharad Shrivastava