शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का लखनऊ में 'गो-प्रतिष्ठा' अभियान: "यह शराब की दुकान नहीं"
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में 'गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान' का शंखनाद किया। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए भीड़ कम होने पर कहा कि यह शराब की दुकान नहीं, बल्कि शुद्ध गाय के दूध की दुकान है।
भीड़ पर शंकराचार्य की टिप्पणी और भाजपा पर तंज
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा, "यह शराब की दुकान नहीं, ये सभा शुद्ध गाय की दुकान है। यहां ज्यादा भीड़ हो जाती तो इसका मतलब होता यह शराब की दुकान है। यहां कम भीड़ है, इसी से पता चल रहा है कि यह शुद्ध गाय के दूध की दुकान है।" उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 'भागपा' कहते हुए आरोप लगाया कि यदि लोग पक्के गो-भक्त नहीं होते, तो इतनी रुकावटों के बावजूद यहां आकर बैठे न होते। उन्होंने कार्यक्रम में आए लोगों से अपना नाम नोट कराकर जाने को कहा, क्योंकि वे इस अभियान के संस्थापक सदस्य होंगे।
कार्यक्रम स्थल पर एक महिला को पुलिस ने शंकराचार्य से मिलने से रोका, तो वह भड़क गई और महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की। शंकराचार्य ने दैनिक भास्कर को बताया कि कार्यक्रम की अनुमति 26 शर्तों के साथ मिली है, जिसमें किसी का नाम न लेने की शर्त भी शामिल है, जिससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है।
'राष्ट्रमाता' की मांग और पूर्व के विवाद
शंकराचार्य ने 30 जनवरी को योगी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की थी, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी थी। उन्होंने यह यात्रा 7 मार्च को वाराणसी से शुरू की थी और जौनपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर होते हुए 4 दिन में लखनऊ पहुंचे। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में बटुकों की शिखा खींचने और पिटाई करने की घटना पर भी नाराजगी व्यक्त की, जिसे उन्होंने इतिहास के काले पन्नों में दर्ज बताया।
राजनीतिक दलों का समर्थन
समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मल्होत्रा ने कार्यक्रम में पहुंचकर कहा कि 2027 में सपा सरकार बनने पर गाय को राज्य माता की उपाधि दी जाएगी और सपा इस धर्मयुद्ध में शंकराचार्य के साथ खड़ी है। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और शंकराचार्य के चरणों में दंडवत हुए। उन्होंने प्रदेश में गाय कटने पर चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य का पूर्ण समर्थन किया। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार को 'गैर सनातनी' करार देते हुए यह भी कहा कि सरकार सनातनी धार्मिक कार्यक्रमों के लिए जजिया कर भी वसूलेगी।
योगी आदित्यनाथ और शंकराचार्य के बीच पूर्व की तकरार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 फरवरी को विधानसभा में कहा था कि "हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता" और "कोई भी कानून से ऊपर नहीं"। इसके जवाब में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 14 फरवरी को वाराणसी में कहा था कि "सनातन धर्म में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती" और सरकार या राजनीतिक दल यह तय नहीं कर सकते कि कौन शंकराचार्य होगा। उन्होंने योगी के अहंकार की तुलना 2015 में अखिलेश यादव के अहंकार से की थी।
प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस द्वारा रोके जाने और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की होने के बाद से ही प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तनाव चल रहा है। इस घटना में शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए थे। इसके अलावा, 13 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण के आरोप में एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 27 फरवरी को उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
शंकराचार्य आज रात लखनऊ में रुकेंगे और गुरुवार सुबह की फ्लाइट से अहमदाबाद रवाना होंगे।
Ravi Yadav