मध्य प्रदेश के 24 जिलों पर सूखे का खतरा, उज्जैन सबसे संकटग्रस्त

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मध्य प्रदेश के 24 जिलों पर सूखे का खतरा, उज्जैन सबसे संकटग्रस्त

मध्य प्रदेश के 24 जिलों पर सूखे का खतरा, उज्जैन सबसे संकटग्रस्त

मानसून कमजोर रहने की आशंका

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के बाद राज्य सरकार ने 24 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह संभाग उज्जैन में सबसे अधिक वर्षा की कमी रहने की आशंका है।

सरकार की तैयारी

सरकार ने किसानों को कम पानी वाली फसलें अपनाने, वैकल्पिक बीज उपलब्ध कराने और सिंचाई के इंतजाम बढ़ाने की तैयारी कर ली है। राजस्व और कृषि विभाग ने राहत और बचाव की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

वर्षा का आंकड़ा

1 जून से 1 जुलाई तक सामान्य 139.7 मिमी की तुलना में केवल 92.4 मिमी वर्षा हुई, यानी 47 मिमी की कमी दर्ज की गई। कई जिलों में सामान्य से 20 से 60 प्रतिशत तक वर्षा घाटा दर्ज हो चुका है।

किसानों के लिए सलाह

सरकार किसानों को कम अवधि और कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह देगी। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज का रकबा बढ़ाने पर जोर रहेगा। रिज एंड फरो और डायरेक्ट सीडेड राइस जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।

बीज और सिंचाई की योजना

सरकार ने वैकल्पिक फसलों के पर्याप्त बीज उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। मनरेगा के माध्यम से खेत तालाब और जल संरचनाओं के निर्माण पर काम होगा। सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।

सूखा पड़ने पर कार्रवाई

राजस्व विभाग ने 2020 की सूखा नीति के अनुसार तैयारी कर ली है। खरीफ फसलों के लिए 31 अक्टूबर तक और रबी फसलों के लिए 31 मार्च तक सूखे की घोषणा की जा सकेगी। राहत कार्यों के लिए 20.9 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं।

Arvind Vishwakarma