मध्यप्रदेश में रिकॉर्डतोड़ ठंड, दिसंबर भर सर्द हवाओं का असर
परिचय
मध्यप्रदेश में इस बार सर्दी ने दिसंबर की शुरुआत से ही रिकॉर्ड तोड़ दी है। कई शहरों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच चुका है, जबकि कुछ इलाकों में कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिसंबर और जनवरी में ठंड का यह दौर सामान्य से अधिक लंबा और तीव्र रहेगा।
प्रदेश भर में तापमान में भारी गिरावट
शहडोल के कल्याणपुर में सीजन का सबसे कम न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो अभी तक प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा। उमरिया में तापमान 4.9 डिग्री, पचमढ़ी और राजगढ़ में 5.2 डिग्री दर्ज हुआ। इंदौर में न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री और भोपाल में 6.8 डिग्री तक गिर गया।
ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, बैतूल, धार, नरसिंहपुर, सीधी, रतलाम, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, सतना, खजुराहो, दमोह, टीकमगढ़, गुना और झाबुआ सहित अधिकांश शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा, जिससे सुबह और देर रात कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है।
ठंड बढ़ने की मुख्य वजह: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और जेट स्ट्रीम
मौसम विभाग के अनुसार इस बार हिमालयी क्षेत्रों में लगातार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हैं, जिसके कारण उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों—हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड—में समय से पहले और लगातार बर्फबारी हो रही है। इन क्षेत्रों से आने वाली बर्फीली हवाएं मध्यप्रदेश तक पहुंच रही हैं और तापमान को तेज़ी से गिरा रही हैं।
इसके साथ ही ऊपरी वायुमंडल में जेट स्ट्रीम का प्रभाव भी बढ़ा है। लगभग 12 से 13 किलोमीटर की ऊंचाई पर 222 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बहने वाली यह तेज हवा उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के ऊपर सक्रिय है। जब पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा और मैदानी इलाकों की ठंडी हवाएं इस जेट स्ट्रीम के साथ सक्रिय होती हैं, तो सर्दी का असर दोगुना हो जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार यही स्थिति बन रही है।
दिसंबर-जनवरी में ठंड का पैटर्न
जैसे मानसून के चार महीनों में जुलाई और अगस्त बारिश के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, उसी तरह ठंड के मामले में दिसंबर और जनवरी मध्यप्रदेश के लिए निर्णायक महीने होते हैं। इन्हीं दो महीनों में उत्तर भारत से सबसे ज्यादा ठंडी और सूखी हवाएं राज्य में प्रवेश करती हैं, जिससे दिन और रात दोनों के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाती है।
पिछले 10 वर्षों के आंकड़े भी बताते हैं कि दिसंबर में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से न केवल रातें सर्द रहती हैं, बल्कि कई बार मावठा (ठंडी बारिश) भी होती है। इससे दिन के समय भी ठंड का प्रभाव काफी बढ़ जाता है।
इस बार कितनी लंबी चलेगी ठंड?
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर और जनवरी में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव की स्थिति बनेगी। जनवरी में शीतलहर 20 से 22 दिनों तक सक्रिय रह सकती है। इसका मतलब है कि दोनों महीनों में सामान्य से अधिक कड़ाके की ठंड पड़ेगी, और अधिकतर रातें सर्द व सुहानी के बजाय तीखी ठिठुरन वाली होंगी।
ठंड बढ़ाने वाले प्रमुख कारक
ला नीना का प्रभाव
वैश्विक स्तर पर समुद्री तापमान में बदलाव से जुड़ी ला नीना स्थिति ने भी ठंड को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। इसके कारण उत्तर भारत में ठंडी हवाओं का दौर लंबा चल रहा है और इनका प्रभाव मध्यप्रदेश तक गहरा हो गया है।
पहाड़ों पर समय से पहले और अधिक बर्फबारी
हिमालयी क्षेत्रों में सामान्य से पहले और ज्यादा बर्फबारी दर्ज हुई है। इससे उत्तर दिशा से आने वाली हवाएं बेहद ठंडी और बर्फीली हो गई हैं, जो बिना बाधा के मैदानी इलाकों में प्रवेश कर रही हैं और तापमान को तेजी से नीचे धकेल रही हैं।
ठंडी हवाओं का अधिक अंदर तक प्रवेश
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार ठंडी हवाएं लगभग 25 प्रतिशत ज्यादा अंदर तक घुसी हैं। यानी वे केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित न रहकर मध्य और दक्षिणी मध्यप्रदेश तक भी अपना प्रभाव डाल रही हैं।
पश्चिमी विक्षोभ का लगातार सक्रिय रहना
पश्चिमी विक्षोभ एक के बाद एक सक्रिय हो रहे हैं। इनके कारण पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बादल, ठंडी हवा और कई जगह मावठा देखने को मिल रहा है। इस सिलसिलेवार गतिविधि से ठंड का दौर भी लंबा हो गया है।
मुख्य शहरों में दिसंबर का मौसम ट्रेंड
भोपाल
राजधानी भोपाल में इस बार नवंबर की ठंड ने 84 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। लगातार 15 दिन शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा शीतलहर काल माना गया। 17 नवंबर की रात न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो उस तारीख का ओवरऑल रिकॉर्ड रहा।
दिसंबर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 11 दिसंबर 1966 को रात का तापमान 3.1 डिग्री दर्ज हुआ था, जो अब तक का सबसे कम दिसंबर तापमान है। 2021 में भी पारा 3.4 डिग्री तक गिरा था। पिछले कुछ वर्षों से दिसंबर में आधा से तीन-चौथाई इंच तक बारिश होने का ट्रेंड बना हुआ है, और इस बार भी हल्की बारिश की संभावना जताई जा रही है।
इंदौर
इंदौर में नवंबर की सर्दी ने 25 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। दिसंबर में यहां का रात का तापमान आमतौर पर 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले साल न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री दर्ज हुआ था। 10 साल के आंकड़ों के अनुसार दिन में अधिकतम तापमान लगभग 28 से 31 डिग्री के बीच रहता है।
दिसंबर में इंदौर में बारिश का भी पैटर्न बन गया है और पिछले चार वर्षों से लगातार वर्षा दर्ज की जा रही है। 27 दिसंबर 1936 को रात का तापमान रिकॉर्ड स्तर 1.1 डिग्री तक गिर चुका है, जबकि 31 दिसंबर 2015 को दिन का अधिकतम तापमान 33 डिग्री दर्ज हुआ। 1967 में दिसंबर की कुल मासिक बारिश 108.5 मिमी और 17 दिसंबर 2009 को 24 घंटे में 53 मिमी बारिश का रिकॉर्ड रहा है।
ग्वालियर
ग्वालियर में दिसंबर के दौरान दिन में अपेक्षाकृत गर्मी और रात में तेज ठंड देखने को मिलती है। पिछले 10 साल के आंकड़ों के अनुसार अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 1.8 से 6.9 डिग्री के बीच दर्ज किया गया।
6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री तक पहुंचा, जबकि 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री तक गिर गया था, जो ग्वालियर के लिए बेहद कड़ी ठंड का संकेत है। 1997 में दिसंबर में कुल 106.6 मिमी बारिश और 13 दिसंबर 2013 को 24 घंटे में 32.1 मिमी बारिश दर्ज की गई।
जबलपुर
जबलपुर में भी दिसंबर में ठंड के साथ-साथ बारिश होने का ट्रेंड रहा है। 28 दिसंबर 1960 को दिन का तापमान 33.2 डिग्री तक पहुंचा, जबकि 28 दिसंबर 1902 को रात का तापमान 0.6 डिग्री दर्ज हुआ, जो अब तक का ओवरऑल न्यूनतम रिकॉर्ड है।
वर्ष 1885 में दिसंबर की कुल मासिक बारिश 125 मिमी रही और 16 दिसंबर 1885 को 24 घंटे में 68.1 मिमी वर्षा का रिकॉर्ड दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि जबलपुर में दिसंबर के महीने में मौसम अत्यंत परिवर्तनशील रहता है, जहां एक ओर तेज धूप, वहीं दूसरी ओर तेज ठंड और बारिश भी संभव है।
उज्जैन
उज्जैन में दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात का औसत न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री रहता है। इस महीने औसतन 4.6 मिमी बारिश दर्ज की जाती है और पिछले पांच वर्षों से लगातार दिसंबर में वर्षा हो रही है।
18 दिसंबर 2002 को दिन का तापमान 34.9 डिग्री तक पहुंचा, जो दिसंबर के लिए ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात के समय तापमान 0.5 डिग्री तक गिर चुका है। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 119.4 मिमी और 11 दिसंबर 1967 को 24 घंटे में 35.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश इस बार एक लंबा और कड़ाके की ठंड वाला सर्द मौसम झेलने जा रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, जेट स्ट्रीम, ला नीना की स्थिति और पहाड़ों पर समय से पहले हुई बर्फबारी ने मिलकर ठंड को कई गुना बढ़ा दिया है। शहडोल, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन सहित अधिकांश शहरों में तापमान सामान्य से नीचे जा रहा है और दिसंबर-जनवरी में शीतलहर के 20 से 22 दिन तक बने रहने की आशंका है।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे ठंड से बचाव के पूरे इंतजाम रखें, विशेष रूप से सुबह और रात के समय बाहर निकलते समय गर्म कपड़ों का उपयोग करें, बुजुर्गों और बच्चों की अतिरिक्त देखभाल करें और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखें, क्योंकि आने वाले दिनों में ठंड का प्रकोप और बढ़ सकता है।
Gulzar Ahmad