मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, दिसंबर भर रहेगी सर्द हवाएं

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मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड, दिसंबर भर रहेगी सर्द हवाएं

मध्यप्रदेश में दिसंबर भर कड़ाके की ठंड, शहडोल सबसे ज्यादा सर्द

परिचय

मध्यप्रदेश में इस बार सर्दी सामान्य से काफी अधिक कड़ी हो गई है। नवंबर से ही शुरू हुआ शीतलहर का दौर दिसंबर में भी जारी है और कई शहरों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक गिर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार पूरे दिसंबर महीने में ठंड का असर बहुत तीव्र रहेगा।

राज्यभर में गिरा तापमान, शहडोल सबसे ठंडा

प्रदेश में सबसे कम तापमान शहडोल के कल्याणपुर में दर्ज किया गया, जहां न्यूनतम पारा 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। उमरिया में तापमान 5 डिग्री से भी कम 4.9 डिग्री दर्ज हुआ। पचमढ़ी और राजगढ़ में 5.2 डिग्री, रीवा में 5.8 डिग्री, मलाजखंड में 6.7 डिग्री, मंडला और नौगांव में 7 डिग्री, रायसेन में 7.4 डिग्री और छिंदवाड़ा में 7.8 डिग्री दर्ज किया गया।

शिवपुरी, सतना, बैतूल, खजुराहो, दमोह, नरसिंहपुर, सीधी, रतलाम, टीकमगढ़, गुना और झाबुआ सहित ज्यादातर जिलों में रात का तापमान 10 डिग्री के आसपास या उससे नीचे रहा। इंदौर में तापमान 5.4 डिग्री, भोपाल में 6.8 डिग्री, ग्वालियर में 9.3 डिग्री, उज्जैन में 8.7 डिग्री और जबलपुर में 9.1 डिग्री दर्ज किया गया।

ठंड बढ़ने के मुख्य कारण

मौसम विभाग के अनुसार इस बार की कड़ाके की ठंड के पीछे कई मौसमीय कारण एक साथ सक्रिय हैं। हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ लगातार सक्रिय है, जिससे वहां बर्फबारी हो रही है और उत्तर भारत की ओर से बर्फीली हवाएं तेजी से चल रही हैं। इन्हीं ठंडी हवाओं का रुख मध्यप्रदेश की ओर होने से तापमान में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।

इसके साथ ही ऊंचाई पर बहने वाली तेज जेट स्ट्रीम भी सक्रिय है। यह लगभग 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर 200 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति से चलने वाली हवा है, जो उत्तर भारत के ऊपर प्रभाव डाल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार जब पश्चिमी विक्षोभ, पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा और जेट स्ट्रीम एक साथ सक्रिय हों तो मैदानों में ठंड सामान्य से कहीं अधिक बढ़ जाती है। इस बार मध्यप्रदेश में यही स्थिति बनी हुई है।

नवंबर से ही रिकॉर्ड तोड़ ठंड

इस साल नवंबर में ही सर्दी ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर रहा। 17 नवंबर की रात तापमान 5.2 डिग्री तक उतर गया, जो नवंबर महीने का अब तक का सबसे कम तापमान है। इससे पहले 30 नवंबर 1941 को 6.1 डिग्री दर्ज हुआ था।

इंदौर में भी नवंबर में तापमान 6.4 डिग्री तक गिरा, जो पिछले 25 सालों में सबसे कम रहा। मौसम विभाग का कहना है कि नवंबर में ही कड़ाके की ठंड शुरू होने से दिसंबर और जनवरी में ठंड की अवधि और तीव्रता दोनों में बढ़ोतरी हुई है।

दिसंबर और जनवरी: ठंड के चरम महीने

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जैसे मानसून के चार महीनों में जुलाई और अगस्त सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं, वैसे ही उत्तर भारत और मध्यभारत के लिए दिसंबर और जनवरी ठंड के चरम महीने होते हैं। इन दो महीनों में उत्तर से ठंडी हवाओं की आवक अधिक होती है, जिससे दिन और रात दोनों के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आती है।

पिछले दस साल के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस अवधि में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से कई बार दिसंबर में भी बारिश और ओलावृष्टि जैसी स्थितियां बनती हैं, जिसे स्थानीय भाषा में मावठा कहा जाता है। इससे दिन के समय भी ठंड और अधिक महसूस होती है।

आने वाले दिनों का अनुमान और कोल्ड वेव ट्रेंड

मौसम विभाग का अनुमान है कि दिसंबर के दौरान एक और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे उत्तरी हवाएं और तेज होंगी और दिन-रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर में प्रदेश के कई हिस्सों में शीतलहर चलेगी, जबकि जनवरी में यह स्थिति 20 से 22 दिनों तक बनी रह सकती है।

ला नीना जैसी वैश्विक जलवायु स्थितियां भी इस बार ठंड को लंबा खींचने में भूमिका निभा रही हैं। पहाड़ों पर समय से पहले और ज्यादा बर्फबारी हुई है, ठंडी हवाएं सामान्य से लगभग 25 प्रतिशत अधिक अंदरूनी इलाकों तक पहुंची हैं और पश्चिमी विक्षोभ लगातार सक्रिय बना हुआ है। इन सभी कारणों से कड़ाके की ठंड का दौर लंबा चलने की संभावना है।

मुख्य शहरों में दिसंबर का तापमान रिकॉर्ड और ट्रेंड

भोपाल

राजधानी भोपाल में दिसंबर के दौरान दिन और रात दोनों समय ठंड और हल्की बारिश का मिश्रित ट्रेंड देखा जाता है। पिछले दस में से पांच साल में भोपाल दिसंबर में भीगा है और आधा से तीन चौथाई इंच तक बारिश दर्ज हो चुकी है। दिसंबर का न्यूनतम तापमान का सर्वकालिक रिकॉर्ड 11 दिसंबर 1966 की रात 3.1 डिग्री है, जबकि 2021 में पारा 3.4 डिग्री तक गिर चुका है।

इंदौर

इंदौर में दिसंबर में रात का तापमान आमतौर पर 5 से 8 डिग्री के बीच रहता है। पिछले वर्ष यह 8.6 डिग्री तक पहुंचा था। पिछले दस साल के आंकड़ों के अनुसार दिन में अधिकतम तापमान 28 से 31 डिग्री के दायरे में रहा है। शहर में दिसंबर के दौरान बारिश का भी ट्रेंड है और पिछले चार साल से लगातार वर्षा हो रही है। 27 दिसंबर 1936 को रात का तापमान 1.1 डिग्री तक नीचे चला गया था, जो अब तक का सर्वन्यून रिकॉर्ड है।

ग्वालियर

ग्वालियर में दिन के समय हल्की गर्मी और रात में तेज ठंड का मिश्रण देखा जाता है। पिछले दस साल में यहां अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री के बीच रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 1.8 से 6.9 डिग्री के बीच दर्ज हुआ। 26 दिसंबर 1961 को तापमान मात्र 0.4 डिग्री तक गिर चला गया था।

जबलपुर

जबलपुर में भी दिसंबर में ठंड के साथ बारिश की प्रवृत्ति देखी जाती है। 28 दिसंबर 1960 को यहां दिन का तापमान 33.2 डिग्री तक पहुंचा, जबकि 28 दिसंबर 1902 की रात में तापमान 0.6 डिग्री दर्ज हुआ, जो अब तक का न्यूनतम रिकॉर्ड है। वर्ष 1885 में दिसंबर में सबसे अधिक मासिक बारिश 125 मिलीमीटर दर्ज की गई थी।

उज्जैन

उज्जैन में दिसंबर में दिनों का औसत तापमान करीब 28 डिग्री और रात का औसत तापमान लगभग 9.4 डिग्री रहता है। इस महीने औसतन लगभग 4 से 5 मिलीमीटर बारिश होती है और पिछले पांच साल से लगातार दिसंबर में वर्षा हो रही है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात का तापमान 0.5 डिग्री तक पहुंचा, जो इस शहर के लिए उल्लेखनीय रिकॉर्ड हैं।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में इस साल सर्दी सामान्य से कहीं अधिक कड़ी और लंबी रहने के संकेत हैं। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता, जेट स्ट्रीम का प्रभाव और वैश्विक स्तर पर ला नीना की स्थिति ने मिलकर ठंड को तीव्र बना दिया है। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड के बाद दिसंबर और जनवरी में भी तापमान में बड़ी गिरावट और लम्बे शीतलहर दौर की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि नागरिक अगले कुछ सप्ताह तक कड़ाके की ठंड के लिए तैयार रहें और स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के सभी एहतियाती उपाय अपनाएं।

Ravi Yadav