मध्यप्रदेश विधानसभा में दो विधेयकों पर चर्चा, किसानों के मुआवज़े पर हंगामे के आसार
मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। इस दौरान सदन की कार्यवाही में दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा प्रस्तावित है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक इन विधेयकों पर अपने-अपने पक्ष रखेंगे, जबकि किसानों के मुआवज़े का मुद्दा एक बार फिर से सत्र का मुख्य राजनीतिक विषय बनने के संकेत दे रहा है।
दुकान-स्थापना और नगरपालिका से जुड़े विधेयक आज सदन में
आज विधानसभा में मध्यप्रदेश दुकान तथा स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025 और मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2025 पर चर्चा होगी। दोनों प्रावधानों में संशोधन के संबंध में पक्ष और विपक्ष के विधायक अपने विचार रखेंगे। इन विधेयकों के माध्यम से राज्य में दुकानों, प्रतिष्ठानों और नगर निकायों से जुड़े नियमों में बदलाव से संबंधित प्रावधानों पर विचार किया जाएगा।
अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवज़ा न मिलने पर विवाद
अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों को राहत राशि न मिलने का मुद्दा आज फिर से उठने की संभावना है। कांग्रेस के विधायक इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। सत्र के पहले दिन भी अतिवृष्टि से किसानों की खराब हुई फसलों के मामले पर नियम 139 के तहत लगभग पांच घंटे तक लंबी चर्चा हुई थी। इसके बावजूद विपक्ष का आरोप है कि प्रभावित किसानों को पर्याप्त राहत नहीं मिल सकी है, जिस कारण यह विवाद फिर भड़क सकता है।
शीतकालीन सत्र की कम अवधि पर कांग्रेस की नाराज़गी
इस बार मध्यप्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से पांच दिसंबर तक बुलाया गया है। तीन दिसंबर को अवकाश रहने के कारण सदन की बैठकें केवल चार दिनों तक सीमित हैं। कम अवधि के कारण कांग्रेस विधायक नाराज़ हैं और उनका कहना है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा का समय नहीं मिल रहा।
किसानों, MSP और कृषि संकट पर पहले दिन की तीखी बहस
सत्र के पहले दिन ही किसानों, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कृषि संकट को लेकर जोरदार हंगामा हुआ था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार से पूछा था कि क्या मक्का एमएसपी पर खरीदी जाएगी और जिन दरों पर अन्य राज्यों में सोयाबीन खरीदी जा रही है, क्या मध्यप्रदेश में भी उसी दर पर खरीद होगी।
कृषि मंत्री ने इन सवालों के जवाब में “वेट एंड वॉच” यानी प्रतीक्षा करने और स्थिति देखने की बात कही थी। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि जब किसान सरकार की ओर उम्मीद से देख रहे हैं, तब उन्हें केवल इंतजार करने को कहा जा रहा है। इस बहस ने सदन के माहौल को और अधिक तीखा बना दिया।
निष्कर्ष: कम समय में कई विवादित मुद्दों से घिरा सत्र
कुल मिलाकर, कम अवधि वाले इस शीतकालीन सत्र में विधायी कार्यों के साथ-साथ किसानों के मुआवज़े, एमएसपी और कृषि संकट जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो चुका है। आज प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा के अलावा अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों और राहत राशि के विषय पर फिर से जोरदार राजनीतिक बहस होने की संभावना है।
Lokendra Mishra