मकर संक्रांति पर MP में साफ मौसम, कोहरा कम, सर्दी का दौर जारी

· 1 min read
मकर संक्रांति पर MP में साफ मौसम, कोहरा कम, सर्दी का दौर जारी

मकर संक्रांति पर मध्यप्रदेश में साफ मौसम, कई हिस्सों में कोहरे और सर्दी का असर

ज्यादातर शहरों में धूप, रात में सर्दी बनी रहेगी

मकर संक्रांति बुधवार को मनाई जा रही है और इस दिन मध्यप्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत अधिकांश शहरों में दिन के समय धूप खिली रहेगी, हालांकि रात के तापमान में कमी के कारण सर्दी बनी रहेगी। ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग में तेज ठंड का असर जारी रहने की संभावना है।

सुबह का कोहरा और विजिबिलिटी की स्थिति

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार सुबह ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सीहोर, शाजापुर और देवास सहित 15 से अधिक जिलों में दृश्यता 2 से 4 किलोमीटर के बीच रही। इसके बावजूद समग्र रूप से आसमान साफ रहने का अनुमान है।

पतंगबाजी के लिए अनुकूल मौसम, चार दिन तक ड्राई कंडीशन

सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि बुधवार को प्रदेश में मौसम ड्राई रहेगा और अगले चार दिन तक मौसम की यही स्थिति बनी रहने का अनुमान है। कोल्ड वेव या कोल्ड डे के लिए किसी भी हिस्से में अलर्ट जारी नहीं किया गया है। साफ आसमान और बिना शीतलहर के माहौल के कारण विशेष रूप से इंदौर और उज्जैन संभाग सहित मालवा-निमाड़ क्षेत्र में मकर संक्रांति पर होने वाली पतंगबाजी में किसी तरह की बाधा की उम्मीद नहीं है।

ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा, न्यूनतम तापमान में गिरावट

प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में बर्फिली हवाएं सीधे पहुंच रही हैं, जिसकी वजह से यहां ठंड का प्रभाव सबसे अधिक है। सोमवार और मंगलवार की रात ग्वालियर, छतरपुर के नौगांव और कटनी के करौंदी प्रदेश के सबसे ठंडे स्थान रहे। ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस, करौंदी में 4.7 डिग्री, सतना के चित्रकूट में 5.3 डिग्री और नौगांव में 5.5 डिग्री दर्ज किया गया।

इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में पारा 5.8 डिग्री, खजुराहो में 6 डिग्री, दतिया में 6.2 डिग्री, मंडला और राजगढ़ में 6.4 डिग्री और रीवा में 6.5 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके मुकाबले भोपाल में 10.2 डिग्री, इंदौर में 9.5 डिग्री, उज्जैन में 11 डिग्री और जबलपुर में 9.5 डिग्री दर्ज किया गया।

दिन के तापमान में भी उत्तरी क्षेत्र ठंडा

दिन के समय भी उत्तरी मध्यप्रदेश अपेक्षाकृत अधिक ठंडा रहा। मंगलवार को ग्वालियर में अधिकतम तापमान 24.3 डिग्री सेल्सियस, दतिया में 23.4 डिग्री और श्योपुर में 23.2 डिग्री दर्ज किया गया। पचमढ़ी में दिन का तापमान 21.8 डिग्री, खजुराहो में 23.4 डिग्री, नौगांव में 23.5 डिग्री, रीवा में 22.4 डिग्री, सीधी में 23 डिग्री, टीकमगढ़ और उमरिया में 24 डिग्री तथा मलाजखंड में 23 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

पश्चिमी विक्षोभ से दो-तीन दिन बाद बदल सकता है मौसम

पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 15 जनवरी से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम मजबूत है और इसके प्रभाव से दो से तीन दिन बाद मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्सों में मावठा गिरने की संभावना बन सकती है। फिलहाल राज्य में मौसम शुष्क बना रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

कोहरे का असर, ट्रेनों की टाइमिंग बिगड़ी

नए साल की शुरुआत से ही प्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असर दिखाई दे रहा है। दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली कई ट्रेनें निर्धारित समय से देर से चल रही हैं। इनमें मालवा एक्सप्रेस पर सबसे अधिक असर देखा जा रहा है। इसके अलावा पंजाब मेल, जनशताब्दी, झेलम, सचखंड एक्सप्रेस समेत लगभग एक दर्जन ट्रेनें कोहरे के कारण प्रभावित हो रही हैं।

नवंबर-दिसंबर और अब जनवरी में भी रिकॉर्ड तोड़ ठंड

इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर और दिसंबर की सर्दी ने कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नवंबर में 84 साल की सबसे ज्यादा ठंड दर्ज की गई, जबकि दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। जनवरी में भी कड़ाके की ठंड जारी है और विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान शून्य से नीचे भी दर्ज किया जा चुका है। तेज सर्दी, घने कोहरे और शीतलहर के कारण लोगों को ठिठुरन का सामना करना पड़ रहा है।

जनवरी: ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीना

मौसम विभाग के अनुसार जैसे मानसून के चार महीनों—जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर—में जुलाई और अगस्त सबसे अहम होते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत से अधिक बारिश होती है, वैसे ही सर्दी के लिए दिसंबर और जनवरी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन दो महीनों में उत्तर भारत से सर्द हवाएं अधिक मात्रा में मध्यप्रदेश में प्रवेश करती हैं, जिससे तापमान में तेज गिरावट और सर्द हवाओं का दौर देखने को मिलता है। पिछले 10 साल के आंकड़े भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करते हैं।

जनवरी में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने पर प्रदेश के कई हिस्सों में मावठा भी गिरता है। पिछले साल भी कई जिलों में जनवरी के दौरान बारिश हुई थी और इस साल भी महीने के पहले दिन बादल छाए रहे थे।

भोपाल में जनवरी की ठंड और बारिश के रिकॉर्ड

भोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड के साथ दिन में कभी-कभी हल्की गर्माहट और बारिश का ट्रेंड देखने को मिलता है। 18 जनवरी 1935 को शहर का न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जो ऐतिहासिक स्तर माना जाता है। वहीं, 26 जनवरी 2009 को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

पिछले 10 वर्षों में से सात साल जनवरी में बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 6 जनवरी 2004 के नाम है, जब 2 इंच वर्षा दर्ज हुई थी। जनवरी 1948 में सर्वाधिक मासिक बारिश 3.8 इंच दर्ज की गई थी।

इंदौर में माइनस तापमान का रिकॉर्ड

इंदौर में जनवरी माह में सर्दी का रिकॉर्ड शून्य से नीचे तक गया है। 16 जनवरी 1935 को न्यूनतम तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो शहर का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 27 जनवरी 1990 को अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।

इंदौर में 24 घंटे में सर्वाधिक वर्षा का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 का है, जब 3 इंच से अधिक बारिश हुई थी। उसी वर्ष जनवरी में कुल मासिक बारिश 4 इंच रही, जो अब तक का सर्वाधिक मासिक रिकॉर्ड है।

जबलपुर में सर्दी और बारिश का रुझान

जबलपुर में भी जनवरी में ठंड और बारिश का स्पष्ट ट्रेंड देखा जाता है। 7 जनवरी 1946 को न्यूनतम तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो रिकॉर्ड स्तर की ठंड थी। वहीं, 7 जनवरी 1973 को अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा।

जबलपुर में 24 घंटे में सर्वाधिक 2.5 इंच बारिश 24 जनवरी 1919 को दर्ज की गई थी, जबकि उसी वर्ष जनवरी माह में कुल 8 इंच से अधिक वर्षा हुई थी।

ग्वालियर में उत्तरी हवाओं से कड़ाके की ठंड

उत्तरी हवाओं के सीधे प्रभाव के कारण ग्वालियर-चंबल क्षेत्र जनवरी में प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका रहता है। पिछले 10 साल के रिकॉर्ड के अनुसार 2018 में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 24 जनवरी 1954 को ग्वालियर में रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था।

जनवरी में ग्वालियर में बारिश भी सामान्य है। 2014 से 2024 के बीच 9 साल जनवरी में वर्षा दर्ज की गई। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 8 जनवरी 1926 का है, जब 2.1 इंच पानी गिरा था। 1948 में जनवरी की कुल मासिक बारिश 3.1 इंच दर्ज की गई थी।

उज्जैन में जीरो डिग्री तक पहुंचा तापमान

उज्जैन में भी उत्तरी हवा के प्रभाव से कड़ाके की ठंड दर्ज की जाती है। 22 जनवरी 1962 को न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में यहां जनवरी के दौरान तापमान 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज होता रहा है।

उज्जैन में 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 को बना, जब लगभग सवा इंच वर्षा हुई। जनवरी 1994 में कुल मासिक बारिश 2.2 इंच दर्ज की गई, जो इस महीने के लिए सर्वाधिक है।

निष्कर्ष: त्योहार पर राहत, लेकिन ठंड का प्रभाव बरकरार

कुल मिलाकर मकर संक्रांति के दिन मध्यप्रदेश में साफ आसमान और धूप के कारण लोगों को त्योहार मनाने में सुविधा होगी, विशेष रूप से पतंगबाजी के शौकीनों के लिए मौसम अनुकूल रहेगा। हालांकि ग्वालियर-चंबल और उत्तरी हिस्सों में कड़ाके की ठंड और कोहरा अभी भी जारी है। आगामी दिनों में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ से मौसम में एक बार फिर बदलाव और मावठा गिरने की संभावना बनी हुई है, जिससे ठंड का दौर आगे भी जारी रह सकता है।

Sachin Saxena