सवाल. राष्ट्रपति की मौजूदगी में आपने एक बार फिर महर्षि सांदीपनी का जिक्र किया..सूर्य का जिक्र किया..उत्तरायण से दक्षिणायन का जिक्र किया..और कही न कहीं फिर उज्जैन कनेक्शन..21 जून का दिन..क्या कहेंगे? जवाब सूर्य का उत्तरायण से दक्षिण जाना ना तो यह उज्जैन के लिए है ना प्रदेश के लिए है यह वैश्विक स्तर की बात है..जिसमें हम सनातन संस्कृति के समय से कालगणना की दृष्टि से दुनिया के अंदर पृथ्वी का अपने 23.26 अंश से झुकना..यह हमारे देश के गौरव की तरफ ले जाता है..एशिया की तरफ ले जाता है..जीपीएस तो अब बना है लेकिन जीपीएस के बजाय भी हजारों साल से कॉल करना का केंद्र पूरा एशियाई मानकर चलता कि भारत से होता है..और भारत में वह हमारा सहयोग है मध्य प्रदेश से होता है..इसी बात को रेखांकित करते हुए अगर समय गणना का केंद्र बनेगा भविष्य में..तो वह वापस हमारे प्रदेश में गौरव आएगा..300 साल पहले जब हम गुलाम थे तो फ्रांस की राजधानी पेरिस से 50 साल तक स्टैंडर्ड टाइम तय हुआ उसके बाद इंग्लैंड या वर्तमान में ग्रीनविच से स्टैंडर्ड टाइम तय होता है..250 साल से वहां से हो रहा है..लेकिन वह सम सामयिक नहीं है..वह सही गणना अगर करना है तो हमें इस बात का संतोष भी है कि इस दृष्टि से हमारे देश के विद्वानों के अलावा भी आसपास के कई ऐसे देश के विद्वान जिसमें अपन नाम सुनोगे तो चौंक जाएंगे जो खगोल घटना के टाइम स्टैंडर्ड टाइम को समझने वाले विद्वान है वह चीन के हो पाकिस्तान के हो बांग्लादेश के हो भूटान नेपाल वर्मा और बाकी हो..वह भी इस बात से सहमत हैं कि यह समय गणना का केंद्र वहां से हटना चाहिए और वह साउथ एशिया में आना चाहिए..भारत में आना चाहिए.. सवाल आपने महर्षि सांदीपनी का जिक्र किया..उज्जैन से उनका कहीं न कहीं काशी से भी कनेक्शन है? जवाब सांदीपनी जी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह मूल रूप से आश्रम चलाते थे काशी में लेकिन जैसे कंस ने महाराज उग्रसेन की सत्ता को अपने हाथ में लिया..और जैसा होता आया है कि जब इस तरह की अराजकता बनती है तो सभी व्यवस्था ध्वस्त होती है..उसमें आश्रम गुरुकुल,पद्धतियां ध्वस्त होतीं हैं..ऐसा कहते हैं कि उस समय वे तीर्थाटन के लिए निकल गए..उस समय तक उनका माना जाता था कि उनका 6 माह का बच्चा उनके साथ था..उनकी पत्नी को घूमते हुए वर्तमान के द्वारका के प्रवास पाटन क्षेत्र में उस काल में जो जम जाती रहती थी जिसको कहा जाता है कि वह विदेशी आक्रांता थे..जैसे अभी आजादी के समय तक हमारे यहां देश के बॉर्डर पर कई जगह अलग-अलग कहीं फ्रांसीसी का..कहीं पुर्तगालियों का..कहीं अंग्रेजों का अलग-अलग प्रकार से कई हिस्सों में उनकी अपने आइडेंटिटी थी..ऐसा कहते हैं कि उस समय जो जम नाम की जातियां हैं....ऐसा माना जाता है कि इन जातियां का प्रभास पाटन के क्षेत्र में उनका प्रभाव था.. जब हमारे सांदीपनी महाराज उधर गए तो सांदीपनि जी की विशेषता ये थी कि वह बहुत विद्वान व्यक्ति थे,बहुत अच्छे आचार्य जिनको अपने शिष्यों को 64 कला 14 विद्या देने की उनमें क्षमता थी..इसी को लेकर उस समय उन आतंकवादियों ने उन्हें पकड़ लिया और उनसे कहा कि हमारे बच्चों को आप शिक्षा ग्रहण कराईए..लेकिन वह देशभक्त थे..सांदीपनी जी ने कहा कि मैं यह नहीं कर सकता हूं मैं अपने देश की शिक्षा दीक्षा तो इस देश के देशभक्तों के लिए रखता हूं..तो इसलिए मैं यह नहीं करूंगा ऐसा कहते हैं कि उसका परिणाम सबने उनके साथ बड़ा दुर्व्यवहार किया..और अंतर जो हमेशा तरीका होता है कि सब करने के बाद उनके बच्चे को बलात अपने कब्जे में कर लिया..लेकिन उन्होंने इसके बावजूद भी कहा कि भले ही मेरे बच्चे को या मुझे किसी को भी कुछ हो जाए लेकिन मैं अपने देश के इस ज्ञान को विदेशियों को देशद्रोहियों को नहीं बांट सकता.. सवाल विरासत से विकास की बात होती रहती है..तो क्या माना जाए..विरासत में विकास जरूरी है..या फिर विकास में विरासत,आपकी डेस्टीनेशन कैबिनेट की बात हो या फिर जनजातीय संस्कृति सहेजने की..सभी में यही परिलक्षित हो रहा है? जवाब.. अगर आप जड़ों से कट जाओगे तो आपके पास बचेगा क्या..हमारे लिए ये सौभाग्य की बात है कि..इस देश के अंदर प्राचीन ज्ञान इतना अच्छा है..जिसके भरोसे से हम अपनी विकास की और विरासत की..दोनों का एक तरह से तालमेल कराकर आगे बढ़ रहे हैं..जैसे मैं बताता हूं आपको,अकबर जैसे शासक से लड़ने का साहस अगर रानी दुर्गावती में था तो उनका एक गौरवशाली पक्ष क्यों नहीं आना चाहिए ऐसे में हमने उनकी जयंती के लिए विशेष पूरा वर्ष डिक्लेयर किया..और उनकी जो राजधानी आती..संग्रामपुर,दमोह के पास मूल राजधानी बाद में उनकी राजधानी जबलपुर हुई दोनों जगह हमने कैबिनेट करते हुए अतीत को स्मरण करने का काम किया...राजा भभूत सिंह ने पचमढ़ी से अंग्रेजों के खिलाफ अपनी खूब अच्छी लड़ाई लड़ी..टंट्या मामा ने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के समय से जो उन्होंने अपना संघर्ष किया उनके नाम ने हमने खरगोन में विश्वविद्यालय बनाया..ऐसे करते-करते हमने हर क्षेत्र के लिए अहिल्या माता के लिए हमने महेश्वर में और राजवाड़ा इंदौर में कैबिनेट की...यह गौरवशाली पक्ष है जिसको हमने उनके उसे गौरवशाली योगदान के साथ जोड़ने का काम किया.. सवाल यानि जिनका योगदान था जो नायक थे..इतिहास के पन्नों को पलटकर..धरोहरों को सामने लाए..बात नायकों की जिसमें सम्राट विक्रमादित्य तो मिशाल हैं? जवाब देखिए कैबिनेट तो हर सप्ताह होती है..लेकिन कैबिनेट के आधार पर हम उनका मान सम्मान राज्य की ओर से दे रहे हैं और वह स्थानीय विषय भी जोड़कर के कुछ अच्छे निर्णय वहां भी करते हैं..मुझे इस बात का संतोष है कि महाराजा यशवंत राव दृवारा स्थापित इंदौर का राजवाड़ा ऐसा स्थान है जहां हमने पहली बार पूरे मंत्रिमंडल के साथ कैबिनेट की यह अपने आप में गौरव का विषय रहा..उसमें क्या गलत है..सुशासन की उत्कृष्ट मिसाल विक्रमादित्य है कि नहीं..जब विक्रमादित्य की बात आती तो उनकी वीरता,उनका साहस,उनका शौर्य,उनका योग्य लोगों का मंत्रिमंडल जो उनके नवरत्नों की परंपरा तक जाता है..तो वह अतीत का ऐसा नायक है जो जीवन में 2000 साल पहले एक तरह से राम राज्य का स्मरण कराता है तो तो उनके जीवन के चरित्र को सबके सामने लाना..तीनों तरह से एकेडमिक साइड से उनका अपना जो पक्ष है..वह स्कूल हों या कॉलेज एजुकेशन में भी आना चाहिए..दूसरा इस प्रकार से जो लोक रंजन में जनता के बीच जीवन के विविध पक्षों को लाना चाहिए उसके आधार पर फैलोशिप भी देना रिसर्च सेंटर भी बनाना..सभी समाहित हैं..जितने प्रमाण है उनकी जानकारी जुटा करके उनका साहित्य का प्रकाशन करना उनसे जुड़े विद्वान जो रिसर्च करते हैं उनको हम फैलोशिप भी दे रहे हैं...मुझे इस बात का गर्व है कि इसी भावना के अनुसार राजपुरोहित जी को प्रधानमंत्री जी पदृम श्री देते हैं..पीएम की भावना अनुसार हम उनका दिल्ली में भी और बनारस में भी मंचन करते हैं... सवाल सिंहस्थ की बात करें तो..कहा जाता है कि यह 7000 साल पुराना इतिहास है..इसमें एक प्रसंग महादेव और माता पार्वती का भी आता जब वहां अकाल की का जिक्र होता है..आपने कई मंचों पर इसको सुनाया भी..वो क्या है..? जवाब देखिए हर एक देवता का किसी नगरी से संबंध जब आता है तो उसका कोई ऐतिहासिक कथाएं, लोक कथाएं लोक गाथा होती हैं..ऐसे में भगवान शिव का प्राकटृय...महाकाल के प्राकटृय..का शिव पुराण में एक वर्णन है..उसमें शिव पुराण के वर्णन में एक किसी बालक जो यादव बालक था वह देखता है कि एक महात्मा जी आते हैं और मिट्टी के शिवलिंग बना करके उनकी पंचामृत पूजा अभिषेक करते हैं बच्चे की जिज्ञासा रहती है वह पूछता है कि यह क्या करा आपने...महात्मा ने कहा कि हमने महादेव का पूजन किया है..बालक ने कहा इससे क्या होता है..तब महात्म ने कहा..ऐसा करने से ईश्वर हमारी सभी मनोकामनाओं पूरी करता है और कष्टों का निवारण करता है...बच्चे के मन में बैठ जाता है कि इसका अर्थ जब कभी आपको परेशानी आती है..तो भगवान का स्मरण करो वो आपको मार्ग निकालते हैं..काल के प्रभाव में ऐसा होता कि उज्जैन में अकाल पड़ जाता तो बच्चे को ध्यान में आता है कि भगवान को पूजा करो...भगवान से मनोकामना कर..भगवान आशीर्वाद देंगे..अब बच्चा जैसे उनकी समझ है वह अपने घर वालों को बताता है और अपने ढंग से पूजा के लिए शिवलिंग बनाकर के पूजा करने बैठ जाता है..शिव पुराण में वर्णन भी है जिसमें महाकाल की गाथा के दृष्टि से वह एक दिन हो जाता दो दिन हो जाता बगैर खाए पिए वह अपनी साधना में लीन हो जाता..बालक के मन में तो यही बैठा है कि उन्होंने सुना है तो भगवान को प्रकट होना ही चाहिए..तो एक तरह से वह अपनी तपस्या के मार्ग पर चल निकलता है और ऐसा होता है कि भोलेनाथ तो भोले हैं उस बच्चे की तपस्या देखकर,हालत देखकर के भगवान स्वयं प्रकट होते हैं..जब महाकाल प्रकट होते हैं तो बच्चे को गोदी में लेते हैं उसको अपने दुलार से बच्चे की भावना समझते हैं तो बच्चे से पूछते बोलो क्या करना है...बच्चा बोला में तो इस अकाल के प्रभाव से महसूस कर रहा था तो..हमारे इस क्षेत्र में कभी अकाल नहीं पड़ना चाहिए और आपकी कृपा होगी तो यह हो जाएगा. सवाल. जल गंगा सवंर्धन अभियान बड़ी चुनौती है..कहते हैं अगला कोई संकट होगा तो वह जल संकट होगा..और डॉ मोहन पहले ही सचेत हैं? जवाब हमारे पांच तत्वों में से सर्वाधिक प्रधान तत्व हमारा जल है..जल है तो जीवन है..ऐसे में जल के लिए आज के अवसर पर जल की खपत भी बड़ी है और जल की चुनौती भी बड़ी है..ऐसे में हमारी जितनी जल रचना हैं उन जल रचनाओं पर दोबारा काम करने के बाद प्रधानमंत्री ने गुजरात में बहुत अच्छा मॉडल खड़ा किया था और संयोग से हमारे पूरे 12 वर्ष के त्योहारों को देखोगे..तो त्योहारों में ही सब बातें अपने आप छुपी हैं..तो गंगा दशमी के उत्सव को जोड़कर हमने गुड़ी पड़वा से गंगा दशमी तक 1 महीने पहले..गंगा दशमी के 1 महीने बाद तक लगातार सरकार बनने के बाद..हमने इसमें जल गंगा अभियान चलाया...यह आयोजन हमारे लिए अच्छी बात है कि हमने एक तरफ हमारे प्राचीन जल स्रोतों का कायाकल्प किया..हमने प्रयास किया कुएं,तालाब बावड़ी सबका लगाओ भी रहता है..पहले तो यह होता ही था कि कोई आदमी जब अपने जीवन काल में अपनी गृहस्थी के अलावा जीवन में सामर्थ हासिल करता है तो वह पुण्य कार्य के लिए कोई बावड़ी बना देता था कोई घाट बनाता था कोई तालाब बनाया करता था..यह सब करके प्रकृति का अपने आप में जो एक आनंद है..बूंद बूंद से जल बचाने को लेकर..हम उस दिशा में काम कर रहे हैं..आज लगभग में मानकर चलता हूं कि इसी साल देश में सर्वाधिक रूप से जल संरक्षण की जल रचनाओं में काम करने के लिए प्रदेश..देश में नंबर वन बना.. सवाल 84 महादेव और हरसिद्धि माता को लेकर कोई नया पहलु देखने को मिलेगा..क्योंकि हरसिद्धि माता का कनेक्शन गुजरात से है..वो भी मोदी के बड़नगर से? जवाब मैं बताता हूं आपको..जब कोई महापुरूष बड़ा संकल्प लेता है..तो बड़े संकल्प में उसको कई ऐसी सामाजिक घटनाओं से प्रेरणा भी मिलती है..ये वो घटनाक्रम है जब विक्रमादित्य काल था..जब विक्रमादित्य ने अपना विजय अभियान शुरू किया तो मां दुर्गा यानि हरसिद्धि माता की आराधना से उन्हें आशीर्वाद मिला....उसके भरोसे से उन्हें अपने विजय अभियान प्रारंभ किया..और उस समय की सबसे बर्बर जाति से लड़ने का उन्होंने सामर्थ दिखाया..उस समय विक्रमादित्य ने माता से उज्जैन विराजने का आव्हान किया..उनकी भावना,पूजा,अर्चना से माता प्रसन्न हुईं और उज्जैन से ये नाता जुड़ा..ऐसा माना जाता है कि माता दिन में उज्जैन में विराजतीं हैं..रात को बड़नगर में..मैं दोनों जगह गया हूं..सोमनाथ के पास वो स्थान है..जहां शयनकाल एक तरह से उनका झूला अपने आप चलने लगता है..जिससे मां के आने और जाने का एहसास होता है..ये आस्था का विषय है..इसमें हम कुछ नहीं बोल सकते..उज्जैन में भी एक भाव है..समय की नगरी के साथ सृष्टि के सृजन का स्थान भी है..काल गणना की नगरी है..हमारा शरीर पंचतत्व से बना है..शरीर कब बनता है..जब आत्मा प्रवेश करती है..मां की एक बूंद आती है..और उससे हमारा शरीर बनता है..तो ये शरीर के अंदर..जो यत् पिंडे तत् ब्रह्माण्डे..ऐसा एक वेद वाक्य है..दोनों का अपना संबध में..इसको भगवान कृष्ण ने 13 वें अध्याय में..क्षेत्र और क्षत्रग अध्याय में समझाया..एक पूरा अध्याय भी है..पंच तत्वों के शरीर के अंदर पांच ज्ञानेंद्रियां,पांच कर्मइंद्रियां..और फिर हमारा शरीर मन,बुद्वि,आत्मा,अहंकार इन तत्वों से क्षेत्र और क्षत्रग का संबंध एकाकार होता है..जिसको आप आत्मा के माध्यम से संचालित करते हैं..जब अपन पूरी पृथ्वी की कल्पना करते हैं तो..तो पृथ्वी सप्त सागरों से जैसे हमने देखा है..84 लाख योनियों में से एकमात्र हमारा मनुष्य शरीर है जो शरीर के बलबूते पर हम अपने जीवन के अंदर वह सारे तत्व पाए..आप कभी कल्पना करो हमारी जितनी योनियां है 84 लाख..उसमें हमारा शरीर क्यों अलग है..मैं आपको दिखाता हूं..जैसे हमारे लिए परमात्मा ने इस तत्व को दोनों को मिलाकर एक करा है इसलिए बाकी से हम अलग हैं..लेकिन बाकी हमसे अलग कैसे हैं..आप देखो कि हमारे शरीर से कई गुना बड़ा हाथी..घोड़ा किसी को भी नदी में डाल दो पानी में वह जीवन में कभी पानी में नहीं गए होंगे लेकिन अपने आप तैर कर बाहर आ जाएंगे..लेकिन मनुष्य एक मात्र है जब तक तैरना नहीं सीखेगा वह बाहर नहीं आ सकता..तो यह हमको उन 84 लाख योनियों से अलग करता है..हमको अपने प्रयास करना पड़ेगे..हमारे इस प्रयास के बलबूते पर हम हवाई जहाज का आविष्कार कर लेते हो वायु मार्ग से भी जाने का एक नया मार्ग बन जाता है..हमारे प्रयास का परिणाम इतनी बड़ी रेल हमारी बुद्धि से चल जाती है..बड़े-बड़े जहाज चल जाते हैं..बाकी पक्षी प्राणी..अपने जीवन काल में उस शरीर का ही उपयोग करते हैं. सवाल क्या फोकस सिंहस्थ और उज्जैन पर..तीर्थ दर्शन योजना में क्या मप्र के धार्मिक सर्किट बनाने को लेकर कोई प्लान तो तीर्थ मेला प्राधिकरण जैसे प्रकल्पों का और बेहतर उपयोग नहीं किया जा सकता? जवाब तीर्थ दर्शन योजना में मप्र के धार्मिक सर्किट को जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है..फोकस केवल उज्जैन पर नहीं पूरे प्रदेश पर है..भोपाल का रेलवे स्टेशन सिंहस्थ के बहाने से इसकी व्यवस्था बना रहा है..निशातपुरा का जो स्टेशन है..यहइंदौर उज्जैन को जोड़ने वाला कनेक्शन होगा..मंदसौर से लगाकर नीमच तक का ओंकारेश्वर लेकर खंडवा तक का..यह सारे देवस्थान..हमारे 13 जिलों को आने वाले योजना..से जोड़ने का काम कर रहे हैं..जब यात्री आएगा तो केवल एक जगह नहीं रुकेगा..40 करोड़ लोग आने वाले हैं..बाकी जगह देवस्थान को हम तीर्थ स्थल के रूप में बना रहे..वहां भी रूकेंगे..काम सिंहस्थ के बाद में भी जारी रहेंगे..कृष्ण पाथेय,श्री राम पाथेय का काम जारी है..कोई लोक बनने से वहां एक बार निर्माण कार्य का आकर्षण बनता 2 साल 4 साल यात्री आएंगे लेकिन बाद में उसे पर कोई निराशा नहीं आ जाए..जैसे आज हम देखते हैं कि उज्जैन की महाकाल की सवारी तो हजारों साल से निकल रही है..सवारी का वैभव बढ़ता जा रहा है तो सवारी के निमित्त लोग आ रहे हैं..फिर हमने महाकाल उत्सव..चालू कर दिया ताकि महाकाल उत्सव के दरमियान भी लोग आएं..इसी प्रकार से तीर्थ मेला प्राधिकरण जैसे प्रकल्पों के जरिए..मप्र के अंदर भी और बाहर भी धार्मिक पर्यटन का बड़ा स्कोप खड़ा करेंगे..तीर्थ दर्शन योजना..विकास प्राधिकरण को लेकर बहुत सारे विकास के काम भी चलेंगे..धार्मिक पर्यटन आएगा लेकिन सुविधा है तो हमारा परिवहन विभाग भी शामिल रहेगा..हमारा एविएशन भी आ जाएगा तो हम यह सारे विभागों को जोड़कर नया रोडमैप चाहे पर्यटन में हो या किसान कल्याण में..जिसमें 16 विभाग मिला करके हम एक साथ काम कर रहे हैं..यदि आपसे ही बात करू तो आपके सुख वैभव और कल्याण की बात करता हूं तो..मैं आपको केवल भोजन की थाली में थेड़े देखूंगा..आपके बाकी प्रबंधन की बात भी करूंगा..आपके आवास की निवास की..आपके भविष्य की..आपके परिवार की..तो जब समग्र बात करूंगा तो कई सारे विभाग जुड़ जाते हैं हम समग्र रूप से किसान कल्याण की बात करते तो प्राकृतिक खेती भी आएगी..गौ पालन भी आएगा,मत्स्य पालन भी आएगा,परिवहन भी आएगा,लोक परिवहन भी आएगा,एजुकेशन भी आएगी,बिजली भी आएगी..यानि सरकार समग्र विकास पर फोकस रखती है. सवाल धर्म के साथ संस्कृति और संस्कृति को संजोने लागे होने वाले..यूसीसी में भी डॉ मोहन यादव ने प्राथमिकता से प्रावधान किए..तो पर्यावरण,वन्यजीव संरक्षण,चीता प्रोजेक्ट सभी साथ लेकर आगे बढ़ रही डॉ मोहन सरकार? जवाब देखो चीता कहां जीता है मप्र में जीता है चीता..जब हम एक समान..कानून की बात करते हैं.. तो मुझे इस बात का गर्व होता है कि डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस पार्टी को इस विचार से खड़ा किया कि..एक देश..एक विधान..एक निशान..एक प्रधान..एक राष्ट्रभाषा..इस देश के प्रत्येक नागरिक एक समान तो इनकी..अपने जो धर्म के आधार पर अलग से कानून क्यों होना चाहिए हमारे लिए एक समान जो हिंदू,मुसलमान,सिख,ईसाई,पारसी..सब एक जैसे लोग है..हम सब एक बगीचे के गुलदस्ते के फूल हैं..तो हम सबको मिलकर के एक साथ उसी भाव के आधार पर चलना चाहिए..चीता प्रोजेक्ट आज हमारे लिए एक तरह से जैव और वन्य संपदा की दृष्टि से बड़ा उदाहरण बना..जो 100 साल से ज्यादा समय तक एशिया के अंदर जो होते थे आज वह समाप्त हो गए..आज पूरा जीवन का वह सबसे बड़ा उदाहरण हमारे यहां बन रहे..केवल चीता ही क्यों..गिद्व को देखो,मगर को देखो,घड़ियाल को देखो,तेंदुआ को देखो,लैपर्ड,टाईगर हरेक क्षेत्र में अंदर हमारे पास सभी प्रकार से संपन्नता है..मुखिया होने के नाते..हमारी सरकार इस बात पर काम कर रही है कि हम अपनी जो आपसे मैं बात कही..यत् पिंडे तत् ब्रह्माण्डे..परमात्मा ने कई जन्मों के पुण्य के बाद हमको मानव शरीर दिया है तो यह प्रकृति का वह स्वरूप जैसा है वैसा बनाए रखने का भी प्रयास होना चाहिए..और जहां कहीं व्यवधान आया है..उसको आज युक्ति बुद्धि के तरीके से कैसे उसको पुर्नस्थापित कर दें..उसके प्रयास में ही हम बड़े हैं और उसी आधार पर हम एक तरफ मानव के मूलभूत सुविधाओं की तरफ आगे बढ़ रहे हैं दूसरा प्रकृति का वह स्वरूप जो मध्य प्रदेश को परमात्मा ने दिया है उसको वैसे ही बनाए रखने के लिए प्रयास भी कर रहे. सवाल उच्च शिक्षा मंत्री से मुख्यमंत्री के सफर के बीच में व्यस्तताएं बड़ी हैं..कामकाज की शैली भी बदली है..अध्ययन के लिए समय कैसे निकाल लेते हैं? जवाब देखिए एक बहुत अच्छा घोष वाक्य है..जहां चाह वहां राह..हमारे मन में प्रश्न आना चाहिए..जिज्ञासा होना चाहिए..तो आपके पास सब साहित्य तुरंत अपनी तरफ आता है..इसलिए मेरे आवागमन के रास्ते में..रात्रि विश्राम के समय..समय मिलता है मैं अध्ययन करता हूं..मुझे अध्ययन का बहुत शौक है..मजा आता है पड़ने में..अध्ययन तो सब करते हैं..लेकिन अध्ययन के आद चिंतन और मनन इसमें भी डूबना चाहिए..जब हम स्वाध्याय करते हैं चर्चा करते हैं बात करते हैं..तो उसका मार्ग निकलता है..जैसे आपसे बात करी तो पूरे विषय पर बात करी..यानि सुनना भी चाहिए. सवाल आप जब कहीं संबोधन देते और कोई जनप्रतिनिधि अपनी मांग रखता है..तो डॉ मोहन यादव तत्काल उसे देने की घोषणा कर देते हैं..यहां मप्र की आर्थिक स्थिति को भी उस समय ध्यान में रखते हैं? जवाब देखिए मप्र की आर्थिक स्थिति हमारे आने बाद बहुत सुधरी है..समृद्व हुई है मैं आपको आंकड़े बता सकता हूं..हमारी सरकार लगभग 3 लाख करोड़ के बजट से आगे बढ़ी 3 साल हो गए हमने 1 रूपया कर नहीं लगाया..लेकिन सुशासन के बलबूते इसी साल 4 लाख 38000 करोड़ का बजट हमने निकाला..आप एक एक करके विभाग देख लो..जहां की सबसिडियां सालों से पेंडिंग थी वो सारीं हमने समय रहते पूरी करके दीं..जो कमिटमेंट हमारा है उसको पूरा करने से लेकर..इंडस्ट्री के बेल्ट में देखो तो आज हमने 2026 मार्च तक की जितनी देनदारियां थीं पूरी कर दीं..इसके साथ-साथ हमने कई सारे विभागों के काम भी एक समय सीमा के अंदर करने की जो पद्धति डाली इसके कारण से हमारे राज्य की वित्तीय व्यवस्था आज भारत सरकार पैमाने पर खरी है. सवाल बीते ढाई सालों में आपने कई चौंकाने वाले निर्णय लेते हैं..अगामी कार्यकाल में भी यह दिखेगा? जवाब आपने प्रोत्साहित किया इसके लिए धन्यवाद..यह मोदी का युग है..यह जो निर्णय लिए हैं..चौंकाने वाले नहीं..बल्कि दूरगामी निर्णय हैं..निर्णयों के साथ मोदी जी ने सिखाया है..कि जब आप काम में डुबोगे तो काम के साथ चलने की आदत डल जाएगी.. सवाल उच्च शिक्षा मंत्री बनने के पहले ये जो आध्यात्म की रूचि थी..सामाजिक सरोकार की बात हो..या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को छूते हुए जो अनछुए पहलु..हैं..जनचेतना..उसको लेकर के..ये ख्याल कबसे आए..स्टूडेंट लाइफ से या उसके बाद से? जवाब देखिए विचारधारा ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की है..और संस्कृति को लेकर चलने की..मैं अकेला नहीं हूं हमारे जैसे बहुत लोग हैं..1925 में जब आरएसएस के प्रथम सरसंघचालक जी ने इस संघ को खड़ा किया तो वे इस बात को लेकर प्रतिबद्व थे कि उस समय उन्होंने देख लिया था कि जब वह कांग्रेस के साथ भी जुड़े थे..फिर कांग्रेस को छोड़ा.. क्रांतिकारियों के साथ जुड़े उन्हें भी छोड़ा..उस समय देश की आजादी का संघर्ष का समय चल रहा था और यह एहसास कर लिया था कि देश तो आज ने तो कल आजाद होने वाला है लेकिन आपको मालूम देश की आखिरी आजादी सरकार कौन सी मानते हैं..हमारा आजादी का आखिरी शासन करता है मोटे तौर पर दिल्ली की तरफ निगाह दौड़ाओगे तो आखरी शासनकर्ता पृथ्वीराज चौहान हुए..बाद के काल में मुगल,पठान,सुल्तान जो जो भी आते गए..लेकिन देश के अंदर हमारी सत्ता करीब 800 से 1000 साल पुराने उस दौर तक ले जाती है..जब इतना लंबा समय हमारी आजादी के लिए हमको हासिल करना पड़ा तो इस आजादी को लंबे समय तक टिकाने के लिए..ऐसे देशभक्तों की मलिका बनाने की जरूरत होगी..इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हमारे सरसंघचालक हेडगेवार ने सपना देखा तब उन्होंने कहा कि हमको राष्ट्र के लिए ऐसे देशभक्त नागरिकों की बड़ी मालिका खड़ी करना पड़ेगी..और वह केवल राजनीतिक क्षेत्र में नहीं चाहिए..वो जीवन के सब क्षेत्रों में चाहिए..देशभक्त व्यापारी होना चाहिए..देशभक्त सैनिक होना चाहिए..सब क्षेत्र में इस प्रकार से तो उनके उसे विचार के बलबूते पर आज पूरे देश के अंदर ऐसी सारी बड़ी हजारों लाखों लोगों की एक ताकत बनीं. बॉक्स सवाल वैदिक घड़ी..काशी विश्वनाथ में लगी..तो मप्र सहित देश के सभी प्रमुख स्थानों पर पहुंचेगी क्या? जवाब काशी विश्वनाथ में तो लगी है..यहां आप सीएम हाउस के बाहर भी देख सकते हैं..अब मप्र सहित देश के सभी धार्मिक स्थलों और प्रमुख स्थानों पर लगाई जाएगी. सवाल मोहन जी ने ढाई साल पूरे कर लिए..लेकिन अगले ढाई साल में..ऐसे कौन से काम है जो मोहन जी की सोच से..मतलब कहीं बहुत आगे एक सरप्राइज दे सकते हैं..क्योंकि जो काम किया उसका फालोअप प्लान भी निश्चित होगा..ढाई साल के रिकार्ड भी कई हैं? जवाब धन्यवाद आपका..यह बात सही है कि जब मैं पीछे पलट के देखता हूं तो लगता कि काफी काम किया है..लेकिन जब आगे देखता हूं तो लगता है कुछ हुआ ही नहीं..करना बहुत कुछ है..फॉलो प्लान भी चल रहा है..पलटकर देखता हूं तो आपके भोपाल में यूनियन कार्बाइड का कचरा दिखता है..जिस दिन घटना हुई थी मैं भी था भोपाल में..संयोग से विधार्थी परिषद की एक बैठक हुई थी..रात हमने गुजारी थी..लेकिन मैं उस दौर को देखता हूं तो डर जाता हूं..लेकिन यह कांग्रेस का..फिर राजनीति की बात आएगी..लेकिन फिर भी कांग्रेस के लोगों ने उस दौर में घटना के जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की..उघोगपति को भगाने के लिए विमान दिया जहां हजारों लोग मर गए..कांग्रेस कभी उस पाप से मुक्त नहीं हो सकती..हमने उस स्थान को न केवल साफ किया..सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायालय के निर्देश के अनुसार हमने उसका निस्तारण भी कराया और यहां विकास के कई सारे काम भी कराए..रही बात अगले ढाई साल की तो पूरे देश में मप्र अपनी क्षमता,बुद्वि,युक्ति से आगे बढ़ रहा है..हम अपने अचीवमेंट बीते ढाई साल में देखते हैं..हम देश के मध्य में हैं..लेकिन बेरोजगारी कम होने के बाद में भी हमारे राज्य की जीडीपी..जीएसडीपी और कैसे बड़े..इस दिशा में काम कर रहे हैं..हमारा राज्य और कैसे समृद्ध हो, हमारे जो अनुकूलता है कि हमारा लैंडबैंक बहुत अच्छा है,हमारे संसाधन बहुत अच्छे हैं,हमारे यहां के लोग बहुत अच्छे हैं,दूध उत्पादन में हम नंबर वन हो सकते हैं,आज 12 परसेंट हैं 20 प्रतिशत से आगे जाने वाले हैं,ऐसे प्रत्येक क्षेत्र के टारगेट लेकर योजना बनाकर तरीके से आगे बढ़ रहे हैं..आप ढाई साल की बात कर रहे हैं हम 2047 तक कल्पना कर रहे हैं,जब हमारी सरकार बनी थी लगभग एक लाख रूपए प्रति व्यक्ति आय थी..आप अंदाजा लगा लो 1956 में मध्य प्रदेश बना और 2002 और 2003 तक प्रति व्यक्ति आय केवल एक लाख थी..यह उनके काम करने का तरीका और हमारे काम करने का तरीका जब हम आए और अब 1 लाख 70000 रुपए प्रति व्यक्ति आय हुई..और जब 2047 आएगा हम मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 22 लाख 50 हजार रुपए प्रति व्यक्ति होगी इस कामना से आगे बढ़ रहे हैं. सवाल अधिकारियों की जमावट कसावट में डॉ मोहन का सीधा संदेश जो काम का वो जमीनी जमावट में फिट और जो लापरवाह या कामचोर वो वाापस? जवाब देखिए ये बहुत सरल बात..जब हम अपने आदर्श शासन की विक्रमादित्य से लेकर मोदी जी की तरफ देखते हैं..तो हम उनसे ही सीखते हैं..कि हरेक चीमज को टाइट फ्रेम में लाना है..हमको कोई अहंकार नहीं है..अधिकारी मतलब अधिक कार्य करने वाला..मैं भी स्वयं यह बात खुद पर लागू करता हूं..हम जितनी बड़ी जगह पर जाएंगे हम अपने आपको उतनी कठोरता से और उतनी दक्षता से हमको काम करना है ऐसे में..अच्छा काम करेगा उसको फील्ड में मौका देते हैं..फील्ड में अच्छा काम करो..और अगर वह नहीं करता है..हम एक बार दो बार मौका देकर देखते हैं..नहीं करता तो वल्लभ भवन में बहुत सारी जगह हैं बिठा देतें हैं. सवाल बीते सिंहस्थों की तुलना में..वर्ष 2028 का सिंहस्थ डॉ मोहन यादव के लिए कितना अलग और अहम..टीमें भी सरकार के स्तर से कुंभ से लेकर वैष्णों देवी तक रिसर्च कर रहीं? जवाब पीएम मोदी के नेतृत्व में यह जो हमारा विरासत से विकास का अभियान चल रहा है..आप देखिए केवल सिंहस्थ नहीं हमारे देवस्थानों पर भी धार्मिक तीर्थाटन से इकोनामी में बदलाव आया है..बड़ा उदाहरण हमारा बनारस का है,धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से..ओरिजिनल तमिल संगमम से लेकर के पूरे देश के अंदर यह जो संकेत छिपे हुए हैं कि केवल मौज मस्ती है इसलिए नहीं...धार्मिक भावना के बलबूते भी देश का सांस्कृतिक ताना-बाना कितना मजबूत होता है..कि हम अपने राज्यों के बाहर आकर भी..हमारे कल्चर से जुड़कर के देश की आंतरिक शक्ति बढ़ा सकते हैं...तो इसमें हजारों करोड़ का करोबार होता है..अपने घर से बाहर आने का मतलब देश के अंदर के बाकी जनमानस से जुड़ने का एक आत्मीयता बनाने का अवसर रहता है..इसलिए अयोध्या,बनारस,सोमनाथ,उज्जैन सहित कई क्षेत्र विकसित हो रहे हैं..क्राउड मैनेजमेंट इसलिए जरूरी है कि दुनियां के 40 करोड़ लोग उज्जैन आएंगे..उनकी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी उठाना बड़ी चुनौती है..प्रयाग में एक अच्छी बात है की मां गंगा की धारा बहुत बड़ी है..यमुना की धारा गंगा की धारा..लेकिन हमको पानी की चुनौती..हमारी शिप्रा जी की बारिश की धारा आती है तो हमने उसमें प्रयोग किया है कि वह बारिश की धारा के बाद भी धारा बनी रहे इसलिए..करीब 30 किमी का घाट निर्माण कराया..नमामि गंगे मिशन चला था..उसे गंगा मिशन के माध्यम से गंगा बेसिन के माध्यम से पानी को स्टोर करने का पानी की नदियां एक राज्य के अंदर की नदी से नदी जोड़ो अभियान की यह..हमारा एक प्रयोग है जिसमें हमने कान नदी इंदौर का पानी शिफ्ट करने का प्रयोग किया..
मोहन के मन की बात.. उपलब्धियों का आत्मविश्वास, भविष्य का संकल्प; यही है मोहन सरकार की दिशा ( जहां चाह वहां राह: लक्ष्य बड़े, सफर लंबा अभी बहुत कुछ करना बाकी है) राकेश अग्निहोत्री महेंद्र विश्वकर्मा के साथ