मोहन सरकार के मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड : 18 माह में कई जिलों में नहीं गए .

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मोहन सरकार  के  मंत्रियों  का  रिपोर्ट कार्ड :  18 माह  में कई  जिलों  में  नहीं गए .

मोहन सरकार के मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड: प्रभार मिलने के 18 माह बाद भी कई जिलों में नहीं गए

मोहन सरकार के प्रभारी मंत्रियों को अगस्त 2024 में जिलों का प्रभार सौंपा गया था, इस निर्देश के साथ कि वे अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करेंगे, रात रुकेंगे और स्थानीय स्तर पर बैठकें लेंगे। हालांकि, डेढ़ साल का रिपोर्ट कार्ड सामने आया है, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं कि कई मंत्री अपने आवंटित जिलों में अपेक्षित दौरे नहीं कर पाए।

कई मंत्रियों ने नहीं किए पर्याप्त दौरे

रिपोर्ट कार्ड के अनुसार, कई मंत्री तो ऐसे हैं जो प्रभार मिलने के 18 महीनों में दस बार भी अपने जिलों में नहीं गए। जिलों से प्राप्त जमीनी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है, जिसे पार्टी द्वारा गंभीरता से लिया जा सकता है। भविष्य में मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में यह रिपोर्ट एक अहम भूमिका निभा सकती है।

प्रमुख मंत्रियों का प्रदर्शन

रिपोर्ट के विस्तृत विश्लेषण में उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा जबलपुर जैसे अपने प्रभार वाले जिले में सिर्फ दो रात रुके और एक बैठक ली। इसी तरह, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला शहडोल में मात्र दो रात रुके और दो बैठकें आयोजित कीं। कैलाश विजयवर्गीय धार में रात रुके ही नहीं, और सतना में भी सिर्फ एक रात का प्रवास किया। राकेश सिंह ने नर्मदापुरम की अभी तक कोई बैठक नहीं ली है, जबकि प्रहलाद पटेल भिंड में केवल दो रात रुके।

जिन्होंने कोई बैठक नहीं ली और रात्रि दौरा नहीं किया

रिपोर्ट के अनुसार, राकेश सिंह, विश्वास सारंग और राकेश शुक्ला ने अपने प्रभार वाले जिलों में एक भी बैठक नहीं ली। वहीं, कैलाश विजयवर्गीय, राकेश शुक्ला, कृष्णा गौर और चैतन्य काश्यप ने एक भी रात्रि दौरा नहीं किया।

रात्रि दौरों और बैठकों के लाभ

यदि प्रभारी मंत्री रात्रि दौरे करते और बैठकें लेते, तो इसके चार प्रमुख फायदे होते। पहला, कलेक्टर, एसपी और तहसीलदार जैसे अधिकारी यदि विधायक और कार्यकर्ताओं की नहीं सुनते, तो प्रभारी मंत्री के माध्यम से यह बात मुख्यमंत्री तक पहुंचती और दबाव बनता। दूसरा, रात रुकने से कार्यकर्ताओं और विधायकों से सहज मेल-मुलाकात और अनौपचारिक चर्चा हो पाती, जिससे तीन चौथाई कार्यकर्ता संतुष्ट हो जाते। तीसरा, जिले स्तर पर होने वाले काम प्रभारी मंत्री के जरिए आसानी से हो जाते और भोपाल के काम भी प्रभारी मंत्री करवा देते। चौथा, इससे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अधिकारियों में भी काम के प्रति भरोसा बढ़ता।

Satyam Tripathi