नर्मदा परिक्रमा में मंत्री की बेटी की अनोखी 7 किमी पेंटिंग, बनेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड

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नर्मदा परिक्रमा में मंत्री की बेटी की अनोखी 7 किमी पेंटिंग, बनेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड

नर्मदा परिक्रमा से जुड़ी 7 किलोमीटर लंबी पेंटिंग का अनोखा अभियान

मध्य प्रदेश के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल की बेटी प्रतिज्ञा सिंह पटेल 1330 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा पर निकलने जा रही हैं। इस परिक्रमा की खास बात यह होगी कि वे नर्मदा के पूरे मार्ग को करीब 7 किलोमीटर लंबी पेंटिंग के रूप में दर्ज करेंगी, जिसे विश्व रिकॉर्ड के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।

अमरकंटक से शुरुआत, दो से ढाई साल में पूरी होगी यात्रा

प्रतिज्ञा की नर्मदा परिक्रमा 15 दिसंबर को अमरकंटक से शुरू होगी, जहां उनके पिता प्रहलाद पटेल और परिवारजन भी मौजूद रहेंगे। वे परिक्रमा के नियमों के अनुसार देवउठनी ग्यारस के बाद यात्रा शुरू कर देवशयनी एकादशी तक इसे पूरा करने की योजना पर काम कर रही हैं। अनुमान है कि डॉक्यूमेंटेशन और ऑयल पेंटिंग की प्रक्रिया के कारण इस अभियान में लगभग दो से ढाई साल का समय लगेगा। पहले चरण की अवधि करीब पांच महीने रहेगी, जो बारिश शुरू होने से पहले समाप्त करने की योजना है।

7 किलोमीटर लंबी ऑयल पेंटिंग की योजना

प्रतिज्ञा अमरकंटक से नर्मदा के अरब सागर तक के पूरे सफर का चित्रांकन करेंगी। 1330 किलोमीटर की इस परिक्रमा के दौरान वे नदी के दोनों तटों के दृश्य कैनवस पर उकेरेंगी। हर 150 किलोमीटर के मार्ग के दृश्य लगभग एक किलोमीटर की पेंटिंग में समेटे जाएंगे, जबकि अमरकंटक और ओंकारेश्वर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के लिए लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर तक लंबी पेंटिंग बनाई जा सकती है। इस तरह उनकी पूरी नर्मदा यात्रा को लगभग 7 किलोमीटर लंबे कैनवस पर उतारने की तैयारी है।

उन्होंने संकल्प लिया है कि यह ऑयल पेंटिंग 7,000 मीटर लंबे कैनवस पर बनाई जाएगी। वे मौजूदा विश्व रिकॉर्ड, जिसमें लगभग 5,300 मीटर की पेंटिंग दर्ज है, को पीछे छोड़ने की इच्छा रखती हैं। यह यात्रा हनुमान परिक्रमा के स्वरूप में होगी, जिसमें दोनों तटों को पार करते हुए तटों पर स्थित मंदिरों, तपोभूमियों और परंपराओं का चित्रण और दस्तावेजीकरण किया जाएगा।

डूब क्षेत्र और पुराने तपस्थलों का भी दस्तावेजीकरण

प्रतिज्ञा के परिवार के कई सदस्य पहले भी नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं। उनके पिता प्रहलाद पटेल ने 1994 में पहली बार नर्मदा परिक्रमा की थी और 2005 में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ दोबारा परिक्रमा की। उनके पास 1994 की परिक्रमा की 52 मिनट की वीडियो रिकॉर्डिंग भी है। प्रतिज्ञा का कहना है कि वे इस पुरानी रिकॉर्डिंग के आधार पर अपनी पेंटिंग में यह दिखाएंगी कि 1994 और 2005 में नर्मदा किनारे कौन से तपस्थल कैसे दिखाई देते थे और अब वहां क्या बदलाव आ चुके हैं।

वे उन स्थानों को भी पेंटिंग में शामिल करना चाहती हैं जो अब डूब क्षेत्र में आ चुके हैं और प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देते। जहां पहुंचना कठिन होगा, वहां ड्रोन की मदद से वीडियो और फोटोग्राफी कराकर बाद में उन दृश्यों को पेंटिंग में उतारा जाएगा।

यात्रा में साथ और आवश्यक व्यवस्थाएं

प्रतिज्ञा की इस यात्रा में उनकी मामी भी साथ रहेंगी। पेंटिंग के लिए बड़े कैनवस, स्टैंड और अन्य आवश्यक सामग्री के कारण उन्होंने एक मिनी ट्रक तैयार कराया है, जिसके माध्यम से पूरी यात्रा की लॉजिस्टिक व्यवस्था होगी। वे दिन में लगभग 12 घंटे पेंटिंग के लिए समय देती हैं और यात्रा के दौरान उपलब्ध दिन की रोशनी के अनुसार काम करेंगी।

नेचुरल रंगों से पेंटिंग और पर्यावरण संदेश

प्रतिज्ञा का अधिकांश कार्य पर्यावरण केंद्रित है। वे एक्रेलिक और सिंथेटिक रंगों की जगह प्राकृतिक रंगों का उपयोग करेंगी, जिनमें पत्थरों से बने रंग और गोंद की मदद से तैयार किए गए नेचुरल कलर शामिल होंगे। उनका कहना है कि भारत की नदियों को जैविक और मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहना जरूरी है।

वे अपनी पेंटिंग के माध्यम से यह भी दिखाना चाहती हैं कि पहले नर्मदा को साफ रखने के लिए तांबे के सिक्के और कपास के वस्त्र प्रवाहित किए जाते थे, जो बाद में मछलियों के भोजन का माध्यम बन जाते थे। आज के समय में लोग पानी की सफाई के लिए फिटकरी और काला नमक डालने की बात करते हैं। उनका मानना है कि यदि लोग प्लास्टिक युक्त कपड़े या चुनरी नदी में प्रवाहित करेंगे तो यह नर्मदा के प्रदूषण का कारण बनेगा। इसलिए वे अपने चित्रों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण और नर्मदा के संरक्षण के लिए जागरूक करना चाहती हैं।

लोगों तक परिक्रमा का अनुभव पहुंचाने का उद्देश्य

प्रतिज्ञा चाहती हैं कि उनकी पेंटिंग देखकर कोई भी व्यक्ति यह समझ सके कि नर्मदा परिक्रमा क्या है और किन-किन स्थलों से होकर गुजरती है। उनका विचार है कि जो लोग खुद परिक्रमा पर नहीं जा पाते, वे इस पेंटिंग के माध्यम से नर्मदा तटों, मंदिरों, तपोभूमियों और परंपराओं के दृश्य देख सकें। वे मानती हैं कि यह केवल फोटो या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि लोगों में पर्यावरण और परंपराओं के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने का गंभीर प्रयास है।

सिंहस्थ 2028 में प्रदर्शन की संभावना

नर्मदा यात्रा पूरी होने के बाद इस विशाल पेंटिंग को 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में प्रदर्शित करने की योजना है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी तय नहीं है, लेकिन उनके गुरु ने भी सिंहस्थ में इसे प्रदर्शित करने की इच्छा जताई है। यात्रा और पेंटिंग पूरी होने के बाद इस अनूठे काम को बड़े स्तर पर लोगों के सामने लाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रतिज्ञा का मानना है कि यह पूरी यात्रा नर्मदा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगी और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक दृश्य दस्तावेज के रूप में काम आएगी।

Sachin Saxena