पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ में बच्चों ने सीखी लोकतंत्र की बारीकियां
एक विशेष आयोजन में स्कूल के बच्चों ने खुद विधायक और मंत्री की भूमिका निभाकर सरकार के कामकाज और विधानसभा की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा। यह कार्यक्रम पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ की ओर से आयोजित किया गया था।
बच्चे बने मंत्री और विधायक
आयोजन के दौरान बच्चों को विधायक और मंत्री की जिम्मेदारियां सौंपी गईं। वे विधानसभा जैसे वातावरण में बैठकर अपनी-अपनी बात रखते दिखे। इस प्रक्रिया में बच्चों ने जाना कि सरकार किस तरह से चलती है और निर्वाचित प्रतिनिधि किस प्रकार काम करते हैं।
मुख्य अतिथि और आयोजकों की भूमिका
कार्यक्रम में संसदीय विद्यापीठ की ओर से एमके राजौरिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। स्कूल की प्राचार्य अनामिका खरे ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष कराया जाता है। उनके अनुसार, इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों से अवगत कराया जाता है, जिससे उनका मानसिक विकास भी होता है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष की बनावट
संसदीय विद्यापीठ के इस सत्र में आधे बच्चे सत्ता पक्ष के रूप में और आधे बच्चे विपक्ष के रूप में बैठे। सत्ता पक्ष में शामिल बच्चों ने अपनी काल्पनिक सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया, जबकि विपक्ष की भूमिका निभा रहे बच्चों ने सवालों के माध्यम से सरकार को घेरा और विभिन्न मुद्दों पर प्रश्न उठाए।
प्रश्नोत्तर और राज्य स्तरीय चयन
सत्र के दौरान बच्चों ने आपस में कई सवाल-जवाब भी किए, जिससे उन्हें लोकतांत्रिक संवाद और बहस की प्रक्रिया का अनुभव मिला। प्राचार्य के अनुसार, इस आयोजन में भाग लेने वाले बच्चों में से विजेताओं का चयन राज्य स्तर पर किया जाता है, जिससे उन्हें आगे और बड़े मंच पर अपनी समझ और कौशल दिखाने का अवसर मिलता है।
लोकतांत्रिक समझ का विकास
आयोजन का निष्कर्ष यही रहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों को न केवल संसद और विधानसभा जैसी संस्थाओं के कामकाज से परिचित कराती हैं, बल्कि उनमें लोकतांत्रिक सोच, सवाल पूछने की क्षमता और तर्कसंगत बहस की आदत भी विकसित करती हैं।
Ravi Yadav