रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में नोटों और आभूषणों से भव्य सजावट

· 1 min read
रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर  में नोटों और आभूषणों से भव्य सजावट

रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में अद्भुत सजावट

मध्य प्रदेश के रतलाम में स्थित महालक्ष्मी मंदिर दिवाली के अवसर पर भव्य रूप से सजाया गया है। यह मंदिर देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जिसे 2 करोड़ रुपये के नोट और आभूषणों से पांच दिनों तक सजाया जाता है। यह परंपरा लगभग 300 साल पुरानी है, जिसे रियासतकालीन समय में रतलाम के महाराजा रतन सिंह राठौर ने शुरू किया था।

भक्तों की ओर से दिए गए धन और आभूषण

दीपोत्सव के दौरान भक्त अपनी श्रद्धा से मंदिर में धन और आभूषण अर्पित करते हैं। इस बार रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, गुजरात और राजस्थान के भक्तों ने बड़ी संख्या में योगदान दिया है। मंदिर परिसर को कुबेर के खजाने जैसा सजाया गया है, जिसमें महालक्ष्मी का आकर्षक श्रृंगार किया गया है।

भक्तों द्वारा अर्पित राशि और आभूषणों की पूरी एंट्री डिजिटल पद्धति से की जाती है। पांच दिनों के दीपोत्सव के बाद ये धन और आभूषण प्रसाद के रूप में वापस भक्तों को लौटा दिए जाते हैं।

सुरक्षा और व्यवस्थापन

मंदिर में भारी राशि और कीमती आभूषणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बंदूकधारी गार्ड और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। माणक चौक पुलिस थाने से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था 24 घंटे मंदिर परिसर पर नजर रखती है।

विशेष महालक्ष्मी श्रृंगार और मान्यता

महालक्ष्मी मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी के साथ गणेश और सरस्वती की मूर्तियां स्थापित हैं। महालक्ष्मी की मूर्ति के हाथ में धन की थैली है, जो वैभव का प्रतीक है। भक्तों का विश्वास है कि जो व्यक्ति अपनी संपत्ति मंदिर में अर्पित करता है, उसके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

निष्कर्ष

रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर दिवाली के अवसर पर भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है। यहां की सजावट और परंपराएं न केवल धार्मिकता को दर्शाती हैं, बल्कि भक्तों की गहरी आस्था को भी उजागर करती हैं। प्राचीन परंपराओं और आधुनिक व्यवस्थाओं के संगम से यह मंदिर एक अद्वितीय धार्मिक स्थल बन गया है।

Vivek Singh