श्रवण कुमार ने मंत्री पद की शपथ, संघर्ष से सफलता तक का सफर

· 1 min read

श्रवण कुमार ने मंत्री पद की शपथ

बिहार की राजनीति में श्रवण कुमार का नाम संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की मिसाल है। उनकी राजनीतिक यात्रा 1974 के जेपी आंदोलन से शुरू हुई और उन्होंने हजारीबाग जेल में जननायक कर्पूरी ठाकुर के मार्गदर्शन में राजनीति के गुर सीखे।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

1985 में नालंदा विधानसभा से उपचुनाव में लोकदल के टिकट पर श्रवण कुमार ने पहली चुनावी लड़ाई लड़ी, लेकिन केवल 2400 मत पाकर हार गए। कर्पूरी ठाकुर ने उन्हें सिखाया कि पार्टी टिकट चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि नेता बनाने के लिए दिया जाता है। उनकी इस सीख ने श्रवण कुमार को नई ऊर्जा दी।

1990 में जनता दल के टिकट पर उन्होंने 50,000 से अधिक वोट हासिल किए, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार से हार गए। 1995 में उन्होंने विधानसभा चुनाव में नालंदा से 44,000 मतों से जीत दर्ज की और तब से वे नीतीश कुमार के विश्वसनीय साथी बने हुए हैं।

नीतीश कुमार के नेतृत्व में मंत्री पद

2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद श्रवण कुमार जेडीयू के मुख्य सचेतक बने। 2014 में जीतन राम मांझी के मंत्रिमंडल में उन्हें ग्रामीण कार्य, ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य विभाग मिला। उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग में उल्लेखनीय काम किया, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी।

सादगी और जनसरोकार

कृषक परिवार से आने वाले श्रवण कुमार की सबसे बड़ी खासियत है कि वे सभी जाति, धर्म और दल के कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करते हैं। उनके क्षेत्र में गरीब, दलित और मध्यम वर्ग उनके मजबूत समर्थक हैं।

2014 से लगातार मंत्री पद पर बने हुए श्रवण कुमार की राजनीतिक यात्रा यह साबित करती है कि लगन, मेहनत और जनसेवा से कोई भी व्यक्ति राजनीति में सफलता की ऊंचाइयां छू सकता है।

Arvind Vishwakarma