स्टालिन का शाह को जवाब: तमिलनाडु की राजनीति गरमाई
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया राजनीतिक चुनौतीपूर्ण बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुजरात में शाह की टिप्पणी के बाद अब तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और एनडीए के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
शाह के विधान पर स्टालिन का पलटवार
स्टालिन ने तिरुवन्नामलाई में डीएमके के युवा विंग की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अमित शाह अहंकार से भरे हुए हैं और वे तमिलनाडु की राजनीतिक व सामाजिक जमीन को नहीं समझते। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यदि शाह अपने साथ पूरी संघ परिवार की टीम भी लेकर आ जाएं, तो भी वे राज्य की राजनीति में खास असर नहीं डाल पाएंगे।
यह बयान अमित शाह के उस कथन के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया था कि बिहार के बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भी आगामी चुनावों में एनडीए की सरकार बनेगी। शाह ने विशेष रूप से ममता बनर्जी और एमके स्टालिन का नाम लेते हुए उन्हें चुनावी तैयारी करने की नसीहत दी थी।
तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी
तमिलनाडु विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल मई 2026 में समाप्त होगा और अनुमान है कि चुनाव आयोग मार्च के बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। इस पृष्ठभूमि में डीएमके और बीजेपी-एआईएडीएमके गठबंधन दोनों ही अपनी-अपनी तैयारियों को तेज कर रहे हैं।
एमके स्टालिन की तिरुवन्नामलाई की सभा इसी राजनीतिक तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं को अगले चुनाव के लिए कमर कसने का संदेश दिया और केंद्र व एनडीए पर हमला तेज किया।
बीजेपी-एआईएडीएमके गठबंधन की वापसी
इस साल अप्रैल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम मिलकर लड़ेंगे। शाह ने यह भी स्पष्ट किया था कि चुनाव ई. पलानीस्वामी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और सीटों का बंटवारा बाद में तय होगा।
शाह के अनुसार, एआईएडीएमके की ओर से गठबंधन में किसी विशेष मांग की बात नहीं है और बीजेपी भी उनके आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगी। उन्होंने इस गठबंधन को दोनों दलों के लिए लाभकारी बताया।
गौरतलब है कि सितंबर 2023 में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के वक्तव्य को लेकर एआईएडीएमके ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। अब दोबारा सहयोग का यह प्रयास तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर को बदलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले विधानसभा चुनावों का समीकरण
तमिलनाडु में 2011 से 2021 तक लगातार दो कार्यकाल एआईएडीएमके की सरकार रही। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए कुल 234 सीटों में से 159 पर जीत दर्ज की। एआईएडीएमके 66 सीटों तक सिमट गई, जबकि भाजपा के खाते में केवल 2 सीटें आईं और अन्य दलों को 7 सीटें मिलीं।
डीएमके की जीत के बाद एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री पद संभाला। इसी कालखंड में भाजपा और एआईएडीएमके के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव भी देखा गया, जो 2023 में गठबंधन टूटने और 2024 के लोकसभा चुनाव में अलग-अलग रास्ते अपनाने तक पहुंच गया।
लोकसभा चुनाव में डीएमके-INDIA गठबंधन की बढ़त
2024 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की 39 सीटों पर डीएमके की अगुआई वाले इंडिया गठबंधन ने पूरी तरह कब्जा जमाया। डीएमके को 22 सीटें, कांग्रेस को 9 सीटें, सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके को 2-2 सीटें, जबकि एमडीएमके और आईयूएमएल को 1-1 सीट मिली। पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी की एकमात्र सीट पर भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की।
इसके उलट, भाजपा और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को तमिलनाडु और पुदुचेरी में एक भी सीट नहीं मिल सकी। इसे दोनों पार्टियों के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया, जिसने राज्य में एनडीए की जमीन को कमजोर कर दिया।
एनडीए से अलग हो रही सहयोगी पार्टियां
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम के प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने अपनी पार्टी को एनडीए गठबंधन से अलग करने की घोषणा कर दी। इससे पहले ओ. पन्नीरसेल्वम भी अपने गुट को एनडीए से बाहर निकाल चुके हैं।
लगातार सहयोगियों के अलग होने से एनडीए की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं और यह देखना होगा कि भाजपा और एआईएडीएमके मिलकर कितनी मजबूत चुनावी जमीन तैयार कर पाते हैं।
निष्कर्ष: तमिलनाडु में कड़ी राजनीतिक चुनौती
एमके स्टालिन और अमित शाह के बीच जुबानी हमले यह संकेत दे रहे हैं कि तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनाव अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होने वाले हैं। एक तरफ डीएमके पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मिली भारी सफलता को अपने पक्ष में हवा बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन नए सिरे से मजबूत वापसी का दावा कर रहा है।
अभी चुनाव में समय है, परंतु बयानबाज़ी और गठबंधन की उठापटक से यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु की राजनीति आने वाले महीनों में राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बनी रहेगी।
Gulzar Ahmad