CJI सूर्यकांत बोले– ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम कटने पर न घबराएं, सुनवाई जारी

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CJI सूर्यकांत बोले– ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम कटने पर न घबराएं, सुनवाई जारी

सुप्रीम कोर्ट ने SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने पर सुनवाई की, लोगों को न घबराने का निर्देश

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं आए, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि 2026 की वोटर लिस्ट में शामिल कई लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के दौरान काट दिए गए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते स्पष्ट किया था कि ऐसे लोगों को नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की आवश्यकता नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। आवश्यकता पड़ने पर अदालत चुनाव आयोग से फॉर्म भरने की समयसीमा बढ़ाने के लिए कह सकती है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को निर्धारित की गई है।

चुनाव आयोग का पूर्व निर्देश और फॉर्म-6 से जुड़ी आशंकाएं

चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को कहा था कि यदि किसी मतदाता का नाम SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वह फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वा सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि चाहे कोई व्यक्ति 10 वर्षों से मतदाता रहा हो, फिर भी उसे फॉर्म-6 ही भरना होगा। आयोग ने यह भी कहा कि इसे झूठा शपथ पत्र नहीं माना जाएगा और न ही कोई मामला दर्ज होगा। फॉर्म-6 में घोषणा करनी होती है कि "मेरा नाम पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़ा जा रहा है" और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत गलत जानकारी देने पर एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

पहले से पंजीकृत मतदाताओं को डर था कि फॉर्म-6 में "पहली बार" वाला कॉलम टिक करने पर उन पर झूठा बयान देने का मामला चल सकता है। इसी भय से लाखों लोग फॉर्म नहीं भर रहे थे। चुनाव आयोग ने इस डर को दूर करते हुए कहा कि इसे फॉल्स डिक्लरेशन नहीं माना जाएगा। आयोग ने अक्टूबर में SIR प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों के लिए फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव किया, जिसके बाद 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी देना अनिवार्य नहीं रहा। आवेदक को अब यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था या नहीं। फॉर्म-6 से संबंधित अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया गया है।

SIR में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन 2025-26 में बिहार, दिल्ली समेत 30 राज्यों में 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए गए। अकेले दिल्ली में 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख नाम हटा दिए गए।

Bhavanesh Soni