तेजस्वी यादव का नया BAAP फॉर्मूला: बिहार चुनाव में जातिगत समीकरणों का बड़ा बदलाव
बिहार की राजनीति में बदलाव की बयार तेजस्वी यादव लेकर आए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने एक नई रणनीति के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने पार्टी के पारंपरिक MY समीकरण (मुस्लिम-यादव) को विस्तार देते हुए BAAP फॉर्मूले की शुरुआत की है। इस फॉर्मूले के तहत पार्टी बहुजन, अगड़ा, आधी आबादी (महिलाएं), और गरीबों को प्राथमिकता देने की योजना बना रही है।
MY से BAAP तक: समीकरण में बड़ा बदलाव
तेजस्वी यादव ने पारंपरिक MY समीकरण को छोड़कर A टू Z की राजनीति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सत्ता में वापसी के लिए सभी जातियों को साथ लाना होगा। RJD के सूत्रों के अनुसार, इस बार पार्टी सवर्णों, खासतौर पर भूमिहारों और कुशवाहा समुदाय को ज्यादा टिकट देने की योजना बना रही है। पिछली बार के मुकाबले यादव समुदाय से कम उम्मीदवार उतारे जाएंगे।
सवर्णों और कुशवाहा समुदाय पर फोकस
2020 के विधानसभा चुनाव में RJD ने केवल 13 सवर्ण उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिनमें से भूमिहार समुदाय का प्रतिनिधित्व केवल एक ही उम्मीदवार ने किया। इस बार तेजस्वी यादव सवर्णों की संख्या को दोगुना करने की योजना बना रहे हैं। भूमिहारों को 8-10 सीटें मिल सकती हैं।
कुशवाहा समुदाय पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लोकसभा चुनाव में कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट देने के प्रयोग के बाद, विधानसभा चुनाव में 13 कुशवाहा उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं। कुशवाहा समुदाय को नीतीश कुमार के कोर वोट बैंक के रूप में देखा जाता है, और तेजस्वी इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
EBC और अतिपिछड़ा वोट बैंक पर रणनीति
बिहार में 36% आबादी वाले EBC (अतिपिछड़ा वर्ग) को साइलेंट वोटर माना जाता है। RJD इस बार EBC समुदाय को 30 टिकट देने की योजना बना रही है, जो पिछले चुनाव में 23 थी। तेजस्वी ने EBC पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पार्टी संगठन में भी बदलाव किए हैं।
नई रणनीति के पीछे सबक और प्रेरणा
तेजस्वी यादव का A टू Z फॉर्मूला उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से प्रेरित है। अखिलेश ने 2019 के लोकसभा चुनाव में यादव-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़कर अन्य जातियों को जोड़ा और 37 सीटें जीतीं। इसी तर्ज पर तेजस्वी बिहार में भी जातीय समीकरण का विस्तार कर रहे हैं।
पुराने विधायकों का टिकट कटेगा
RJD सूत्रों ने संकेत दिया है कि इस बार पार्टी के कम से कम 20 विधायकों का टिकट काटा जा सकता है। खराब प्रदर्शन करने वाले विधायकों को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा। तेजस्वी ने स्पष्ट किया है कि पार्टी में बदलाव और नए चेहरे लाने की जरूरत है।
निष्कर्ष
तेजस्वी यादव का BAAP फॉर्मूला बिहार की राजनीति में एक नई दिशा पेश कर रहा है। यह फॉर्मूला न केवल जातीय समीकरण को संतुलित करने की कोशिश है, बल्कि सत्ता में वापसी के लिए एक व्यापक योजना भी है। अगर यह रणनीति सफल होती है, तो RJD के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक जीत साबित हो सकती है।