उज्जैन में 14 से 18 जनवरी तक श्री महाकाल महोत्सव
मध्य प्रदेश के उज्जैन में 14 से 18 जनवरी तक श्री महाकाल महोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह महोत्सव भगवान महाकाल को समर्पित है और इसका उद्देश्य उज्जैन को देश-दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाना बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ, कई राज्यों के मुख्यमंत्री आमंत्रित
श्री महाकाल महोत्सव का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। इस बड़े आयोजन के लिए सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शामिल हैं।
पहले दिन शंकर महादेवन और बेटों की प्रस्तुति
महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने बेटों के साथ विशेष प्रस्तुति देंगे। उनकी प्रस्तुति शिव-भक्ति और भारतीय संगीत की ऊंचाइयों को स्वर देगी। संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि यह समागम संगीत, नृत्य, नाट्य और लोक परंपराओं के माध्यम से उज्जैन को नई सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान करेगा।
प्रमुख कलाकारों की भागीदारी
महोत्सव में शंकर महादेवन के साथ सिद्धार्थ शिवम् भी प्रस्तुति देंगे। सोना महापात्रा अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण प्रस्तुति से मंच को सशक्त स्वर देंगी। इनके अलावा विपिन अनेजा और श्रेयस शुक्ला जैसे कलाकार भी इस महोत्सव में अपनी सहभागिता से समकालीन सृजन को प्रतिनिधित्व करेंगे।
कला यात्राएं और जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन
उज्जैन के विभिन्न स्थलों से कला यात्राएं निकलेंगी, जो जनजातीय संस्कृति की जीवंतता, रंगों, वाद्यों और नृत्य की लय को प्रदर्शित करती हुई श्री महाकाल महालोक परिसर तक पहुंचेंगी। इन यात्राओं के माध्यम से स्थानीय और जनजातीय परंपराओं को प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय नाट्य दलों की उपस्थिति
इस महोत्सव में इंडोनेशिया और श्रीलंका के नाट्य दल भी भाग लेंगे। उनके प्रदर्शन के माध्यम से भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की प्रस्तुति की जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा।
महोत्सव का समापन और महत्व
18 जनवरी तक चलने वाला यह श्री महाकाल महोत्सव उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला आयोजन माना जा रहा है। संगीत, नृत्य, नाट्य, लोक परंपराओं और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के मेल से यह कार्यक्रम भक्तों और कला-प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
Vivek Singh