भोपाल के कई इलाकों में भूजल खतरनाक रूप से दूषित, पीने पर रोक
भोपाल के आदमपुर छावनी, हरिपुरा, पड़रिया, शांति नगर, अर्जुन नगर, कोलुआ, खानूगांव और वाजपेयी नगर समेत कम से कम सात क्षेत्रों का भूजल गंभीर रूप से दूषित पाया गया है। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार यहां के पानी में ऐसे बैक्टीरिया और रसायन मिले हैं, जो कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
पानी में खतरनाक स्तर तक आयरन, क्रोमियम और अन्य रसायन
रिपोर्ट के मुताबिक इन इलाकों के भूजल में आयरन की मात्रा अनुमेय सीमा से करीब 100 गुना तक अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इतना आयरन युक्त पानी पीने से हेमोक्रोमैटोसिस जैसी बीमारी होने की आशंका रहती है। पानी के नमूनों में टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स), कैल्शियम, टोटल हार्डनेस, सल्फेट और कोलीफॉर्म भी मानकों से ज्यादा मिले हैं।
पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष पांडे का कहना है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) की रिपोर्टों के साथ उनकी खुद की रिसर्च भी इस खतरे की पुष्टि करती है। उनके अनुसार आदमपुर खंती और आसपास के गांवों के भूजल में आयरन और क्रोमियम की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो कैंसर जैसी बीमारियों से जुड़ी मानी जाती है।
ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी, इंदौर जैसी चिंता
भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर से लिए गए भूजल के चार नमूने फेल पाए गए हैं। इनमें ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। यही बैक्टीरिया इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र के पानी में भी मिला था, जहां इसकी वजह से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इस पृष्ठभूमि में भोपाल में ई-कोलाई की मौजूदगी विशेष रूप से चिंताजनक मानी जा रही है।
पडरिया में एक भी हैंडपंप से साफ पानी नहीं
पडरिया क्षेत्र में करीब आठ हैंडपंप हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार किसी भी हैंडपंप से स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है। हैंडपंप से निकलता पानी लाल रंग का दिखाई देता है और उसमें बदबू भी आती है। एक किराना दुकानदार ने बाल्टी में भरे पानी को कांच के गिलास में दिखाकर बताया कि पिछले लगभग दस साल से हैंडपंप से ऐसा ही दूषित पानी आ रहा है। लोग इस पानी का उपयोग पीने के लिए नहीं, बल्कि जमीन पर छिड़काव या कपड़े धोने जैसे कामों में करते हैं।
टैंकरों पर निर्भरता, पर जांच का अभाव
दैनिक भास्कर की टीम ने वॉटर एक्सपर्ट राशिद नूर के साथ आदमपुर खंती के आसपास के सबसे प्रदूषित इलाकों का दौरा किया। टीम के अनुसार कई जगहों का ग्राउंड वाटर पीने तो दूर, बर्तन या हाथ-पैर धोने के लिए भी उपयुक्त नहीं दिखा। ऐसी स्थिति में स्थानीय लोग नगर निगम द्वारा भेजे जाने वाले टैंकरों के पानी पर निर्भर हैं।
शांति नगर के निवासी महेश उईके ने बताया कि वे पीने के लिए निगम के टैंकरों से मिलने वाले पानी का ही उपयोग करते हैं, जबकि खराब भूजल से मजबूरी में फसलों की सिंचाई करनी पड़ती है। पर्यावरणविद् डॉ. पांडे का कहना है कि निगम टैंकरों से पानी सप्लाई तो कर रहा है, लेकिन इन टैंकरों के पानी की जांच नहीं कराई गई है।
दूषित पानी से सिंचाई, मंडियों तक पहुंच रही सब्जियां
दूषित भूजल की समस्या केवल पेयजल तक सीमित नहीं है। इन्हीं इलाकों के दूषित पानी से फल और सब्जियों की सिंचाई भी की जा रही है। ये फल-सब्जियां रोजाना बड़ी मात्रा में भोपाल की विभिन्न मंडियों तक पहुंचती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे पानी से उगाई गई फसलों के नियमित सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक बुरा असर पड़ सकता है।
कचरा डंपिंग साइट से निकलने वाला लिचेट बड़ा कारण
पर्यावरणविद् डॉ. पांडे के अनुसार जनवरी 2018 से आदमपुर छावनी में भोपाल शहर का कचरा डंप किया जा रहा है। डंपिंग साइट पर फिलहाल लगभग 14 लाख टन कचरा जमा हो चुका है। इस कचरे से निकलने वाले रसायन, जिसे लिचेट कहा जाता है, आसपास के कम से कम सात गांवों के भूजल को प्रभावित कर रहे हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दायर की हैं।
CPCB ने अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट में लगभग 80 पन्नों की रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि यहां के पानी में आयरन की मात्रा इतनी अधिक है कि यह न केवल पीने के लिए असुरक्षित है, बल्कि सब्जियों और फसलों की पैदावार के लिए भी उपयुक्त नहीं है। रिपोर्ट में जांचे गए 25 पैरामीटरों में से नौ बेहद खतरनाक स्तर पर पाए गए।
हर दिन 800 टन कचरा पहुंचता है आदमपुर खंती
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भोपाल से रोजाना लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से करीब 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए आदमपुर खंती स्थित डंपिंग साइट पर पहुंचता है। इसमें लगभग 290 टन मिट्टी और करीब 510 टन मिश्रित कचरा शामिल होता है। नगर निगम के पास उपलब्ध प्रोसेसिंग यूनिट की क्षमता लगभग 420 टन प्रतिदिन ही है, जिसके कारण शेष कचरा जमा होता रहता है और समय के साथ बड़ा कचरा ढेर बनता जा रहा है।
समस्या व्यापक, समाधान की तत्काल जरूरत
भोपाल के इन इलाकों में दूषित भूजल, खतरनाक बैक्टीरिया, कैंसरजन्य रसायन और बढ़ते कचरा ढेर मिलकर गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का संकेत दे रहे हैं। पेयजल के सुरक्षित विकल्पों की कमी, टैंकरों के पानी की जांच न होना और दूषित पानी से सिंचाई की मजबूरी स्थिति को और जटिल बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल की नियमित जांच, कचरा प्रबंधन में सुधार और प्रभावित क्षेत्रों में दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
Gulzar Ahmad