उज्जैन में विजयादशमी पर महाकाल की भव्य सवारी
विजयादशमी के पावन अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से भगवान महाकाल की भव्य सवारी निकाली गई। यह सवारी शाम चार बजे चांदी की पालकी में राजसी वैभव के साथ नए शहर फ्रीगंज से दशहरा मैदान के लिए रवाना हुई। दशहरा मैदान में शमी पूजन के बाद सवारी वापस मंदिर लौट गई।
रूट परिवर्तन से भक्तों में नाराजगी
सवारी के निर्धारित रूट को अचानक बदल देने के कारण देवास गेट और बलीपुर क्षेत्र के लोग भगवान महाकाल के दर्शन से वंचित रह गए। नई व्यवस्था के तहत पालकी को देवास गेट से सीधे रेलवे स्टेशन के सामने से इंदौर गेट ले जाया गया। इससे स्थानीय निवासियों में नाराजगी फैल गई। पालकी करीब 20 मिनट तक देवास गेट चौराहे पर रुकी रही। इसके बाद भक्तों के आग्रह पर पालकी को मालीपुरा की ओर से ले जाया गया।
पूजन और स्वागत का आयोजन
मंदिर के सभा मंडप में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने पूजन किया। इसके बाद सवारी दशहरा मैदान के लिए रवाना हुई। मंदिर परिसर के बाहर सशस्त्र पुलिस बल ने भगवान महाकाल को सलामी दी। सवारी में पुलिस बैंड, घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस के जवान, पुजारियों और भक्तों की बड़ी संख्या मौजूद थी।
प्रशासन और मंदिर के बीच तालमेल की कमी
भाजपा नेता विनोद लाला ने बताया कि मंदिर प्रशासन और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल की कमी के कारण सवारी को निर्धारित रूट से हटाना पड़ा। वापसी के समय भी रूट में बदलाव के कारण मालीपुरा के निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया और कहा कि पहले से रूट तय कर लेना चाहिए था।
पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
सवारी के दौरान पूरे शहर में जगह-जगह मंच बनाए गए और भगवान महाकाल की पालकी पर पुष्पवर्षा की गई। सवारी का कुल मार्ग लगभग 19 किलोमीटर का था। भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल का स्वागत किया।
अंतिम पूजन और समापन
दशहरा मैदान में रावण दहन से पहले भगवान महाकाल का विधि-विधान से पूजन किया गया। शमी वृक्ष का पूजन भी किया गया। इसके बाद सवारी वापस महाकालेश्वर मंदिर लौट गई, जहां भक्तों ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।