उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर सियासी समीकरण
2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर सियासी जंग तेज हो गई है. भाजपा समरसता अभियान के जरिए दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, जबकि आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने बहुजन राजनीति को नई धार देने की कोशिश की है.
भाजपा का समरसता अभियान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में संत रविदास जन्मस्थली से समरसता संकल्प अभियान शुरू किया. मंच से सामाजिक समरसता, संत परंपरा और दलित महापुरुषों के सम्मान का संदेश दिया गया. उन्होंने संत रविदास, बाबा साहब अंबेडकर और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े कई ऐलान किए.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी पर दलित महापुरुषों के सम्मान को लेकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बाबा साहब अंबेडकर से जुड़े फैसलों को आगे बढ़ाया है. भदोही को फिर संत रविदास नगर के नाम से पहचान दिलाने और दलित महापुरुषों की प्रतिमाओं व स्मारकों के विकास की घोषणा की.
आजाद समाज पार्टी की रणनीति
भाजपा के अभियान के दो दिन बाद चंद्रशेखर आजाद ने 45 विधानसभा प्रभारियों की पहली सूची जारी की. इस सूची में 18 दलित, 16 ओबीसी, 10 मुस्लिम और एक सिख को जिम्मेदारी दी गई है. सूची में एक भी सवर्ण चेहरा नहीं है. पांच सामान्य सीटों पर भी दलित प्रभारियों की तैनाती की गई है.
आजाद समाज पार्टी का फोकस बहुजन-मुस्लिम सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने पर है.
अन्य दलों की स्थिति
2024 के लोकसभा चुनाव में दलित वोटों का एक हिस्सा इंडिया गठबंधन की ओर गया था. समाजवादी पार्टी के PDA अभियान ने दलित, पिछड़े और मुस्लिम वोटों को साथ लाने की कोशिश की. बसपा के कमजोर प्रदर्शन का फायदा विपक्ष को मिला. समाजवादी पार्टी इसी सामाजिक समीकरण को 2027 तक मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है.
कांग्रेस संविधान, आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों के जरिए दलित समाज के बीच अपनी पैठ बढ़ाने में जुटी है. पार्टी का दावा है कि 2024 में बना सामाजिक गठजोड़ आगे और मजबूत होगा.
मायावती भी आकाश आनंद के सहारे दलित वोट बैंक को लामबंद करने में जुटी हैं. उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट हमेशा सत्ता की चाबी रहा है. 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत सरकार से लेकर 2014 के बाद भाजपा के उभार और 2024 में PDA की चुनौती तक, हर दौर में दलित वोट निर्णायक रहा है.
Pushpendra Chaubey