यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित यमुनोत्री धाम के कपाट आज शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। यह प्रक्रिया दोपहर साढ़े 12 बजे पूरी हुई। कपाट बंद करने से पहले परंपरा के अनुसार खरसाली गांव से शनिदेव की डोली मां यमुना को लेने धाम पहुंची। इस पवित्र क्षण में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मां यमुना के दर्शन अब खरसाली में
कपाट बंद होने के बाद मां यमुना अगले 6 महीने तक खरसाली गांव में विराजमान रहेंगी। इस वर्ष मंदिर समिति ने 50 लाख रुपए से ज्यादा की आय दर्ज की है और 6 लाख से अधिक श्रद्धालु मां के दर्शन कर चुके हैं।
पौराणिक मान्यता और यम द्वितीया
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यम द्वितीया के दिन यमराज और शनिदेव अपनी बहन यमुना से मिलने आए थे। मां यमुना ने उनसे वरदान मांगा कि जो भी भक्त इस दिन उनके जल में स्नान या पूजन करेगा, उसे पापों से मुक्ति मिलेगी और भगवान श्रीकृष्ण व हनुमान की कृपा प्राप्त होगी।
भाई-बहन की पूजा और धार्मिक महत्व
इस दिन भाई-बहन यमुनोत्री धाम पहुंचते हैं। बहनें पूजा की थाली लेकर मां यमुना के चरणों में जल और पुष्प अर्पित करती हैं। यह पूजा भाई के दीर्घायु और बहन के मंगल जीवन का प्रतीक मानी जाती है।
यमुनोत्री की यह परंपरा और मान्यताएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। हर साल हजारों भक्त इस धार्मिक अवसर पर धाम पहुंचते हैं।
Ravi Yadav