यूपी BJP अध्यक्ष पर पंकज चौधरी लगभग फाइनल, कुर्मी कार्ड

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यूपी BJP अध्यक्ष पर पंकज चौधरी लगभग फाइनल, कुर्मी कार्ड

उत्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए पंकज चौधरी का नाम लगभग तय

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी का नाम अंतिम रूप से तय हो चुका है, केवल औपचारिक घोषणा शेष है।

ओबीसी कुर्मी चेहरे पर भाजपा की रणनीतिक सहमति

भाजपा ने पहले ही तय कर लिया था कि प्रदेश अध्यक्ष पद किसी ओबीसी वर्ग के नेता को दिया जाएगा। पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय से आते हैं और 2021 से केंद्र सरकार में मंत्री हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। इसका संकेत उस समय भी मिला था जब 2023 में गोरखपुर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अचानक उनके घर पहुंच गए थे।

प्रदेश संगठन में यह माना जा रहा है कि ओबीसी नेतृत्व के जरिए भाजपा आने वाले चुनावों, विशेषकर पंचायत और विधानसभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरण मजबूत करना चाहती है। कुर्मी समाज के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग में संदेश देने के लिए भी यह चयन महत्वपूर्ण समझा जा रहा है।

लखनऊ में चुनावी प्रक्रिया, मेगा इवेंट की तैयारी

पंकज चौधरी शनिवार सुबह 11 बजे लखनऊ पहुंचेंगे, जहां प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होगी। चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल लखनऊ आएंगे। पार्टी मुख्यालय में दोपहर एक से दो बजे के बीच नामांकन दाखिल होंगे, जिनकी निगरानी केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े करेंगे।

अगले दिन रविवार को पीयूष गोयल चुनाव की शेष प्रक्रिया पूरी कराएंगे। यदि मतदान की आवश्यकता हुई तो 84 संगठनात्मक जिलों से 380 से अधिक प्रांतीय परिषद सदस्य मतदान करेंगे। कुल 98 संगठनात्मक जिले हैं, लेकिन 14 जिलों में अभी जिला अध्यक्ष का चयन न होने के कारण वे इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे।

निर्विरोध चुनाव की संभावना और अन्य दावेदारों की चर्चा

पार्टी सूत्रों का कहना है कि मतदान की नौबत आने की संभावना बेहद कम है और चुनाव लगभग निर्विरोध होने की तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए किसी भी उम्मीदवार के पास कम से कम 10 प्रांतीय परिषद सदस्यों के प्रस्तावक और समर्थक होना जरूरी है। ऐसे में पार्टी द्वारा तय नाम के खिलाफ कोई भी नेता नामांकन दाखिल करने का जोखिम नहीं उठाएगा।

हालांकि, चर्चा में अन्य नाम भी हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह और राज्यसभा सदस्य बाबूराम निषाद शामिल हैं। ब्राह्मण वर्ग से राज्यसभा सदस्य डॉक्टर दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के नाम भी अटकलों में हैं, लेकिन उनकी संभावना कम मानी जा रही है।

लंबे इंतजार के बाद अध्यक्ष पद पर फैसला

उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति लगभग 11 महीने से लंबित थी। यह प्रक्रिया जनवरी 2025 के आसपास पूरी होने की चर्चा थी, लेकिन महाराष्ट्र चुनाव, यूपी उपचुनाव और फिर बिहार चुनाव के कारण निर्णय टलता रहा। अब 16 दिसंबर 2025 से खरमास शुरू होने से पहले, 14 दिसंबर को ही प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की तैयारी है।

विशेष राजनीतिक महत्व इसलिए भी है कि उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष केवल राज्य संगठन ही नहीं, बल्कि पार्टी की केंद्रीय राजनीति और भविष्य की राष्ट्रीय रणनीतियों के लिए भी बेहद अहम माना जाता है।

नए अध्यक्ष के बाद योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार

प्रदेश अध्यक्ष के चयन के तुरंत बाद योगी सरकार 2.0 के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार की भी संभावना है। पूर्व पंचायत राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के केंद्र में मंत्री बनने के बाद कैबिनेट की कुछ कुर्सियां खाली पड़ी हैं।

आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों से पहले विभिन्न जातीय समूहों, विशेष रूप से दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए कुछ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की तैयारी है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि वर्तमान मंत्रियों में जिनके काम को लेकर संगठन, सरकार या कार्यकर्ताओं में असंतोष है, उन्हें बाहर भी किया जा सकता है, हालांकि एक वर्ग चुनाव से पहले किसी को हटाने के पक्ष में नहीं है।

योगी कैबिनेट में मौजूदा स्थिति

इस समय योगी सरकार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक सहित 21 कैबिनेट मंत्री हैं। इसके अलावा 14 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 राज्यमंत्री हैं। कुल मिलाकर 54 मंत्री पद भरे हुए हैं, जबकि संविधान के अनुसार 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी छह पद अभी खाली हैं, जिन पर नए चेहरों को अवसर मिल सकता है।

निष्कर्ष: ओबीसी नेतृत्व के साथ नए राजनीतिक संदेश की तैयारी

कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश भाजपा में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की तैयारी केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है। ओबीसी कुर्मी समाज के प्रभावशाली नेता को शीर्ष पद देकर भाजपा राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपने सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करना चाहती है।

आने वाले समय में प्रदेश अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा और उसके बाद संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से यह साफ हो जाएगा कि पार्टी आगामी चुनावों के लिए किस तरह के जातीय और राजनीतिक संतुलन की रूपरेखा तैयार कर रही है।

Bhavanesh Soni