भगवान भैरव का जन्मोत्सव के लिए मंदिरों में विशेष आयोजन

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भगवान भैरव का जन्मोत्सव  के लिए मंदिरों में विशेष आयोजन

भगवान भैरव का जन्मोत्सव: मंदिरों में विशेष आयोजन

अगहन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर बुधवार को भगवान भैरव का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों जैसे कालभैरव, विक्रांत भैरव, आताल-पाताल भैरव, कुचेरा भैरव और बटुक भैरव मंदिर में धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।

पूजन और महाआरती की विशेष व्यवस्था

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार, भैरव को भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजन और चार प्रहर की साधना का विशेष महत्व है। ब्रह्म योग में होने वाले पूजन को उच्च पद प्रदान करने वाला बताया गया है। अष्ट भैरव का पूजन भी परंपरागत रूप से किया जाता है।

काल भैरव और अन्य मंदिरों में विशेष आयोजन

श्री काल भैरव मंदिर में अष्टमी पर सुबह पूजन-अभिषेक और विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मध्य रात्रि में शासकीय खजाने से लाए गए आभूषण धारण कराए जाएंगे। इसके बाद महाआरती और प्रसाद वितरण होगा। गुरुवार को भगवान की सवारी निकाली जाएगी।

आताल-पाताल भैरव मंदिर में सुबह अभिषेक और मध्य रात्रि को महाआरती के साथ जन्मोत्सव मनाया जाएगा। अगले दिन शाम को राजसी सवारी और भोज के साथ महोत्सव का समापन होगा।

विक्रांत भैरव मंदिर पर सुबह आरती, रुद्राभिषेक, सुंदरकांड और रात में हवन अनुष्ठान होगा। कुचैरा भैरव मंदिर में चोला श्रृंगार और 56 भोग का आयोजन होगा। बटुक भैरव मंदिर में फलों के रसों से अभिषेक और अन्नकूट का आयोजन किया जाएगा।

भक्तों के लिए विशेष आयोजन

जन्मोत्सव के दौरान मंदिरों में महाआरती, प्रसाद वितरण और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भक्तों के लिए किया जाएगा। अगले दिन भगवान की सवारी निकाली जाएगी, जो धार्मिक उत्साह का मुख्य आकर्षण होगी।

Pushpendra Chaubey