बिहार की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी से सियासी तूफान
उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के एक विवादित बयान ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। एक वायरल वीडियो में वह बिहार की लड़कियों को पैसों से जोड़कर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं।
विवादित बयान कैसे सामने आया
मामला उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की सोमेश्वर विधानसभा का है। यहां 2027 के चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू एक कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इसी मंच से उन्होंने एक युवा कार्यकर्ता की अविवाहित स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसकी शादी बिहार से लड़की लाकर करवा देंगे और दावा किया कि वहां 20-25 हजार रुपये में लड़की मिल जाती है।
कार्यक्रम के दौरान दिए गए इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद बयान को लेकर बिहार और उत्तराखंड दोनों राज्यों में जोरदार प्रतिक्रिया सामने आने लगी।
राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया
बिहार बीजेपी और जदयू की निंदा
बयान पर भाजपा की सहयोगी पार्टियों और खुद बिहार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी नाराजगी जताई। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि महिला कोई सौदे की वस्तु नहीं है और यह हर महिला का अपमान है। उन्होंने इसे फूहड़, घोर आपत्तिजनक और शर्मनाक बताते हुए मानसिक दिवालियेपन की निशानी बताया।
जदयू के प्रवक्ता अभिषेक झा ने भी बयान को गलत कहा और स्पष्ट किया कि किसी भी स्थान की महिलाओं का अपमान स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाएं बहन, बेटी और माता के रूप में पूजनीय हैं और उन्हें देवी का रूप माना जाता है।
RJD और कांग्रेस का हमला
राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण मंत्री के पति ने बिहार की बेटियों और उनकी इज्जत के बारे में बेहद नीच टिप्पणी की है, जिससे बिहार की महिलाओं में आक्रोश है।
RJD के आधिकारिक एक्स अकाउंट से विवादित वीडियो साझा कर भाजपा नेतृत्व, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से जवाब मांगते हुए सवाल किया गया कि पार्टी इस बयान पर क्या रुख अपनाएगी।
बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से मांग की कि ऐसे नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया जाए। साथ ही कहा कि बिहार के लोगों और खासकर महिलाओं के सम्मान के साथ इस तरह की भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पूरे बिहार से माफी मांगी जानी चाहिए।
बिहार महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया
बिहार महिला आयोग ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से यह वीडियो देखा और इसके आधार पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गिरधारी लाल साहू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
महिला आयोग ने कहा कि यह बयान शर्मनाक और निंदनीय है, जबकि पूरा समाज देख रहा है कि बिहार की महिलाएं किस तरह शिक्षा, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। आयोग मंत्री के पति को नोटिस भेजकर उनसे औपचारिक जवाब भी मांगेगा।
साहू की सफाई और माफी
विवाद बढ़ने के बाद गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि वे कुछ दिन पहले सोमेश्वर के दौलाघाट क्षेत्र में एक स्वागत समारोह में शामिल हुए थे, जहां भाषण के दौरान अपने एक मित्र की शादी को लेकर मजाकिया संदर्भ में बात कर रहे थे। उनके अनुसार, विरोधियों और कांग्रेस ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है।
साहू ने दावा किया कि वे हर साल बरेली में श्री रामलीला के दौरान 101 निर्धन बेटियों की शादी करवाने में सहयोग करते हैं और बेटियों के सम्मान के लिए लगातार काम करते हैं। साथ ही उन्होंने माफी मांगते हुए खुद को गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने की बात कही।
निष्कर्ष: महिलाओं की गरिमा पर बहस तेज
यह विवादित बयान केवल एक राजनीतिक बयानबाजी का मामला नहीं रहा, बल्कि महिलाओं की गरिमा, सम्मान और उन्हें वस्तु की तरह देखने वाली मानसिकता पर व्यापक बहस का विषय बन गया है। बिहार के राजनीतिक दलों, महिला आयोग और समाज के विभिन्न वर्गों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी राज्य की महिलाओं को अपमानजनक ढंग से प्रस्तुत करना स्वीकार्य नहीं होगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि उत्तराखंड सरकार और संबंधित राजनीतिक दल आगे क्या कार्रवाई करते हैं और इस घटना से महिलाओं के प्रति भाषा और व्यवहार को लेकर क्या सबक लिया जाता है।
Gulzar Ahmad