एमपी में तीन मौसम सिस्टम सक्रिय, भोपाल में बारिश, बैतूल में दीवार गिरी, 1 मौत

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एमपी में तीन मौसम सिस्टम सक्रिय, भोपाल में बारिश, बैतूल में दीवार गिरी, 1 मौत

एमपी में तीन मौसम सिस्टम सक्रिय, भोपाल-बैतूल में भारी बारिश, दीवार गिरने से मजदूर की मौत

मौसम का हाल

मध्य प्रदेश में मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन तीन मजबूत सिस्टम सक्रिय होने से अगले चार दिन प्रदेशभर में झमाझम बारिश जारी रहेगी। मौसम विभाग ने मालवा-निमाड़ (इंदौर और उज्जैन संभाग) में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। भोपाल मौसम केंद्र ने गुरुवार को उज्जैन और सागर समेत 17 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में 4 इंच से अधिक बारिश हो सकती है। राजधानी भोपाल में सुबह से रिमझिम और तेज बारिश का दौर जारी है। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सतना समेत अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं।

बैतूल में हादसा

बैतूल जिले में बुधवार-गुरुवार की रात मूसलधार बारिश के दौरान गंज थाना क्षेत्र में रेलवे की बाउंड्री वॉल झोपड़ी पर गिर गई। इसमें 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मलबे में दबने से मौत हो गई। उनका साथी शनि सिंह मामूली रूप से घायल हुआ है।

मौसम विभाग का अलर्ट

आईएमडी ने अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट पांच जिलों – धार, देवास, बुरहानपुर, हरदा और नर्मदापुरम के लिए जारी किया है। भारी बारिश की चेतावनी 12 जिलों – उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, रायसेन, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी के लिए है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 96 घंटों तक बारिश तेज रहेगी, जिससे नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

बारिश के आंकड़े

अब तक प्रदेश में औसतन 14.1 इंच (359.3 मिमी) बारिश हुई है, जबकि सामान्य 16.9 इंच (428.9 मिमी) है – यानी 16 प्रतिशत कम। पूर्वी एमपी में 15 प्रतिशत और पश्चिमी एमपी में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। 47 जिलों में औसत से कम बारिश हुई है, जबकि भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर में अधिक बारिश हुई है। देवास में सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

बड़े शहरों का रिकॉर्ड

इंदौर में 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 जुलाई 1913 का है। भोपाल में जुलाई में सबसे अधिक 41 इंच (1986) और एक दिन में 11 इंच (22 जुलाई 1973) दर्ज हुआ। जबलपुर में जुलाई में 45 इंच (1930) और 24 घंटे में 13.5 इंच (30 जुलाई 1915) का रिकॉर्ड है। ग्वालियर में जुलाई में सबसे अधिक 24.5 इंच (1935) और 24 घंटे में 7.5 इंच (12 जुलाई 2015) दर्ज हुआ। उज्जैन में जुलाई में मानसून की कुल बारिश का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा होता है।

Adarsh Chaurasiya