मध्य प्रदेश में बिना पंजीयन लिव-इन रहना होगा अपराध, यूसीसी प्रतिवेदन सौंपा

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मध्य प्रदेश में बिना पंजीयन लिव-इन रहना होगा अपराध, यूसीसी प्रतिवेदन सौंपा

मध्य प्रदेश में बिना पंजीयन लिव-इन रहना अपराध

यूसीसी का अंतिम प्रतिवेदन मुख्यमंत्री को सौंपा गया

मध्य प्रदेश में लिव-इन संबंधों में पंजीयन अनिवार्य किया जाएगा। बिना पंजीयन लिव-इन में रहना अपराध की श्रेणी में आएगा।

समिति की अनुशंसाएं

समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रतिवेदन सौंपा। प्रतिवेदन तीन खंडों में है, जिसमें 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां हैं।

लिव-इन संबंधों के प्रावधान

लिव-इन में रहने वालों को पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अलग होने पर रजिस्ट्रार को आवेदन देना होगा। लिव-इन में जन्मी संतान को उत्तराधिकार मिलेगा।

यूसीसी के दायरे से बाहर

अनुसूचित जनजातियों, घुमंतु-अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासियों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया है।

Vivek Singh