सुप्रीम कोर्ट ने POCSO के दुरुपयोग पर चिंता जताई
अदालत ने किशोरों के भागने पर सरकार से सवाल पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किशोर-किशोरियों के बीच सहमति से बने संबंधों में पॉक्सो (POCSO) कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि जब कोई लड़का और लड़की साथ चले जाएं, तो हर मामले को स्वतः पॉक्सो का केस नहीं माना जा सकता।
अदालत ने क्या कहा
जस्टिस बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने पूछा कि सरकार किसी लड़के और लड़की को साथ भागने से कैसे रोक सकती है। पीठ ने कहा कि 15 से 18 साल की उम्र बेहद संवेदनशील और नई चीजें आजमाने की उम्र होती है।
परिवारों की भूमिका पर टिप्पणी
पीठ ने कहा कि कई मामलों में जब किशोरियां अपनी मर्जी से साथी के साथ चली जाती हैं, तो परिवार इज्जत बचाने के लिए लड़के के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करा देता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अंततः आरोपियों को बरी करना पड़ता है।
सुनवाई का संदर्भ
यह टिप्पणी किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान की गई। यह मामला 2023 में कलकत्ता हाईकोर्ट की विवादित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उस फैसले को रद्द कर दिया था।
केंद्र सरकार का सुझाव
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि इस संबंध में कुछ सिफारिशें तैयार की गई हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने पॉक्सो मामलों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय डैशबोर्ड बनाने का सुझाव दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
Bhavanesh Soni