मन की बात में PM ने गिनाईं 2025 की उपलब्धियां

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मन की बात में PM ने गिनाईं 2025 की उपलब्धियां

मन की बात में 2025 की उपलब्धियां और 2026 की चुनौतियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 129वें एपिसोड में वर्ष 2025 को भारत के लिए उपलब्धियों से भरापूरा वर्ष बताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा, खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आने वाले वर्ष 2026 की चुनौतियों और संभावनाओं का भी उल्लेख किया और देश को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

2025: राष्ट्रीय गर्व और वैश्विक प्रभाव का वर्ष

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2025 भारत के लिए गर्व भरे मील के पत्थरों का साल रहा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में देश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं और ऑपरेशन सिंदूर को देश का गर्व बताया। इसके साथ ही खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन, वैज्ञानिक नवाचारों और विश्व के बड़े मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव पर भी बात की।

मोदी ने खेल, वंदे मातरम्, अंतरिक्ष मिशनों, महाकुंभ, राम मंदिर और 77वें गणतंत्र दिवस जैसे प्रमुख आयोजनों और घटनाओं को भी स्मरण किया और उन्हें नवभारत की पहचान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में भारत की छवि पहले से अधिक मजबूत और प्रभावशाली हुई है।

स्वास्थ्य पर चेतावनी: एंटीबायोटिक के अंधाधुंध प्रयोग से बचें

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य से जुड़े एक गंभीर मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि निमोनिया और मूत्र संक्रमण (UTI) जैसी बीमारियों में कई दवाइयां कमजोर साबित हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि इसका मुख्य कारण बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन है। लोग अक्सर जरा सी तबीयत बिगड़ने पर तुरंत गोली खा लेते हैं और मान लेते हैं कि बीमारी दूर हो जाएगी, जबकि इससे दवाओं की प्रभावशीलता घट रही है। पीएम ने लोगों से अपील की कि वे अपने मन से दवाएं न लें और किसी भी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें।

स्थानीय समाधान और सौर ऊर्जा की प्रेरक कहानी

मोदी ने मणिपुर के एक युवा मोइरांगथेम का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह स्थानीय स्तर पर समाधान खोजे जा सकते हैं। मणिपुर के सुदूर क्षेत्र में लंबे समय से बिजली की समस्या थी। इस चुनौती से निपटने के लिए मोइरांगथेम ने सौर ऊर्जा को अपना हथियार बनाया और सोलर पैनल लगाने का अभियान शुरू किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अभियान के परिणामस्वरूप आज उस क्षेत्र के सैकड़ों घरों तक सौर ऊर्जा पहुंच चुकी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के अनुकूल विकास का प्रेरक मॉडल बताया और कहा कि मणिपुर जैसे राज्यों में सौर ऊर्जा पैदा करना अपेक्षाकृत आसान है, जिसका अधिक से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।

भारतीय भाषाओं और प्रवासी भारतीयों का योगदान

मन की बात के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने दुबई में रह रहे एक कन्नड़ परिवार की पहल का भी उल्लेख किया। इस परिवार ने कन्नड़ पाठशाला शुरू की है, जहां बच्चों को कन्नड़ भाषा पढ़ना और लिखना सिखाया जाता है।

मोदी ने बताया कि इस पाठशाला से आज एक हजार से अधिक बच्चे जुड़े हैं। उन्होंने इसे भारतीय भाषा और संस्कृति को विदेश में जीवित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास करार दिया और कहा कि कन्नड़ भूमि और कन्नड़ भाषा, दोनों ही भारत का गर्व हैं।

स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को याद रखने की अपील

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की नायिका पार्वती गिरि को भी याद किया। उन्होंने बताया कि पार्वती गिरि ने मात्र 16 वर्ष की आयु में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया था। आजादी के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया और कई अनाथालयों की स्थापना की।

मोदी ने कहा कि पार्वती गिरि जैसी हस्तियां हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और उनका जीवन हमें राष्ट्र सेवा का मार्ग दिखाता है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे आजादी के नायकों और नायिकाओं की गाथाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का दायित्व निभाएं, ताकि हमारी विरासत भूलाई न जा सके।

मन की बात: बढ़ती पहुंच और बहुभाषी प्रसारण

कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि मन की बात आज 22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों में प्रसारित होता है। इसके अलावा 11 विदेशी भाषाओं में भी इसका प्रसारण किया जाता है, जिनमें फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तो, फारसी, दारी और स्वाहिली शामिल हैं।

मन की बात की ब्रॉडकास्टिंग आकाशवाणी के 500 से अधिक ब्रॉडकास्टिंग केंद्रों से की जाती है। शुरुआती दौर में इस कार्यक्रम की अवधि 14 मिनट थी, जिसे जून 2015 में बढ़ाकर 30 मिनट कर दिया गया। इस मंच के माध्यम से सरकार और जनता के बीच संवाद का एक अनोखा तंत्र विकसित हुआ है।

पिछले एपिसोड और बाल पुरस्कार का संदर्भ

लेख में यह भी याद दिलाया गया कि मन की बात का 128वां एपिसोड 30 नवंबर को प्रसारित हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री ने भारत में खेलों की प्रगति, विंटर टूरिज्म, 'वोकल फॉर लोकल' और वाराणसी में होने वाले काशी-तमिल संगमम पर बात की थी।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री से जुड़ी एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए बताया गया कि वीर बाल दिवस के अवसर पर 26 दिसंबर को 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें क्रिकेटर वैभव सहित कई बच्चे शामिल थे। कुछ बच्चों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जवानों की सेवा की, जबकि ब्योमा नामक बच्ची ने किसी और को बचाने के प्रयास में अपनी जान गंवा दी।

निष्कर्ष: नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का संदेश

मन की बात के इस वर्षांत एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां 2025 की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं 2026 के लिए देश को तैयार रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने स्वास्थ्य जागरूकता, स्वच्छ ऊर्जा, भाषा और संस्कृति के संरक्षण, स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों और युवाओं की भूमिका को विशेष रूप से उजागर किया।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने दोहराया कि भारत आज अनेक मोर्चों पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह यात्रा जनता की भागीदारी और सजगता से ही आगे बढ़ेगी। नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील के साथ उन्होंने मन की बात के इस एपिसोड को समापन दिया।

Gulzar Ahmad