मोहन भागवत बोले: एकजुटता ही समाधान, जैनों को हिंदुओं से अलग न मानें

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मोहन भागवत  बोले:  एकजुटता  ही समाधान,  जैनों  को  हिंदुओं  से अलग न मानें

मोहन भागवत: हम सोए-बंटे हुए हैं, इसलिए हो रहे हैं आक्रमण; एकता ही समाधान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शुक्रवार को जैसलमेर पहुंचे। उन्होंने ऐतिहासिक सोनार दुर्ग स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर में दर्शन-पूजन किया और जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार तथा दादा गुरुदेव की पावन चादर के दर्शन किए। इसके बाद वे देदांसर मेला ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय चादर महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने सद्भावना और एकता का संदेश देते हुए कहा कि आक्रमण इसलिए हो रहे हैं क्योंकि हम सोए और बंटे हुए हैं।

'जैनों को हिंदुओं से अलग न समझें': सद्भावना और सामाजिक समरसता पर जोर

डॉ. भागवत ने सभी से भेद और स्वार्थ को त्यागने का आग्रह किया, ताकि देश के लिए जीने-मरने को तैयार होने पर हमारा समाज अच्छा बन सके। उन्होंने कहा कि कलह और भेद खत्म होने पर भारत विश्वगुरु बनकर एक सुखी-सुंदर दुनिया को जन्म देगा। इससे पूर्व जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैनों को हिंदुओं से अलग समझने का प्रयास कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि हिंदुस्तान में रहने वाले का पहला धर्म हिंदू है। उन्होंने जैन धर्म को परमात्मा महावीर की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने वाला उपदेश बताया।

एकत्व की पहचान और 'कुटुम्ब मित्र' बनाने का आह्वान

कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने दादा गुरुदेव की स्मृति में एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट का लोकार्पण किया, साथ ही 'दादा गुरुदेव' पुस्तक का विमोचन भी किया। यह महोत्सव 871 साल बाद दादा गुरुदेव की पावन चादर के विधिवत अभिषेक और दर्शन का गवाह बना, जिसे देखने देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जैसलमेर पहुंचे हैं। डॉ. भागवत ने एक ट्रेन यात्रा की कहानी सुनाकर समझाया कि झगड़े इसलिए होते हैं क्योंकि हम अपने 'एकत्व' को नहीं पहचानते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंच पर बैठने जैसी व्यवस्था संबंधी ऊँचाई-नीचाई केवल कार्य के लिए होती है, व्यक्तिगत श्रेष्ठता के लिए नहीं। उन्होंने जोर दिया कि सभी समान हैं, क्योंकि सभी का मूल एक है और जन्म से सभी मनुष्य हैं, जाति तो बाद में आती है।

भागवत ने कहा कि दुनियाभर में चल रही समस्याओं का समाधान हमारे पास सद्भावना से व्यवहार करना है। उन्होंने विवादों को सुलझाने के लिए समझौता या तर्क की बजाय सद्भावना को मुख्य रास्ता बताया। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि आज से ही अपने परिचितों को 'कुटुम्ब मित्र' मानने की शुरुआत करें, क्योंकि समय बड़ा कठिन है।

Satyam Tripathi