मोहन भागवत बोले- हिंदू होने का मतलब भारत के लिए जिम्मेदार होना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बेंगलुरु में 'संघ यात्रा के 100 वर्ष: नया क्षितिज' पर आयोजित व्याख्यान में कहा कि हिंदू होने का मतलब भारत माता के लिए जिम्मेदार होना है। उन्होंने कहा कि भारत में कोई गैर-हिंदू नहीं है। मुसलमान और ईसाई सभी एक ही पूर्वजों के वंशज हैं और देश की मूल संस्कृति हिंदू है।
आरएसएस का उद्देश्य सत्ता पाना नहीं
भागवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना है, जिसमें सभी 142 करोड़ हिंदू शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ का लक्ष्य सत्ता पाना नहीं है। संघ का विचार है कि देश में रहने वाला हर व्यक्ति भारत माता के लिए सोचें।
भारत की मूल संस्कृति हिंदू
भागवत ने कहा कि भारत एक प्राचीन राष्ट्र है और उसकी मूल संस्कृति हिंदू है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में कोई व्यक्ति गैर-हिंदू नहीं है क्योंकि सभी भारतीय संस्कृति का पालन करते हैं।
संघ की यात्रा और चुनौतियां
आरएसएस के प्रमुख ने बताया कि संगठन ने लगभग 60-70 वर्षों तक कड़े विरोध का सामना किया है, जिसमें दो बार प्रतिबंध और स्वयंसेवकों की हत्याएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी बाधाओं के बावजूद संघ ने समाज में अपनी विश्वसनीयता बनाई है।
L. N. Bhargava