उज्जैन और इंदौर में महाकाल-लक्ष्मी मंदिरों का भव्य उत्सव
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह रूप चतुर्दशी का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। बाबा महाकाल को गर्म जल से स्नान कराकर केसर-चंदन का उबटन लगाया गया। इसके बाद भगवान को भांग, चंदन और सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया गया। पूजा के बाद अन्नकूट का भोग अर्पित किया गया और दीपावली का उत्सव मनाया गया।
महालक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा
इंदौर के प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली के दिन माता का तीन बार वस्त्र बदलकर विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां देवी की सोने-चांदी के आभूषणों से अलंकृत प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में मकान की प्रतिकृति अर्पित करने की परंपरा है, जिसे घर बनाने की मनोकामना पूरी करने के लिए किया जाता है।
रतलाम के मुक्तिधाम में दीपदान
रतलाम के मुक्तिधामों में दीपावली की पूर्व संध्या पर दीपदान और आतिशबाजी की गई। यह परंपरा 2006 में शुरू हुई थी, जिसमें दीपदान के माध्यम से पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए यमराज को याद किया जाता है।
इन स्थानों पर हजारों भक्तों ने पूजा-अर्चना कर दीपावली का उत्सव मनाया। मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया और भक्तों ने अपनी श्रद्धा से पूजा सामग्री अर्पित की।
Janmejay Chaturvedi