वंदे मातरम् विवाद: कांग्रेस के दो छंद वाले फैसले से भाजपा आक्रामक
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल शुरुआती दो छंद ही गाएगी। 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में गायन के बाद विवाद उपजा था, जिसके बाद पार्टी ने 1937 के अपने पुराने फैसले पर कायम रहने का निर्णय लिया।
भाजपा का हमला
भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के टुकड़े करने और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का फैसला देशविरोधी है और 1937 में मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् के दो टुकड़े करने वाले फैसले ने देश के विभाजन की नींव डाली थी। उन्होंने कांग्रेस पर वोट बैंक के लिए बंकिम बाबू की अमर कृति और शहीदों का अपमान करने का आरोप लगाया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि 1937 में तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम् को दो हिस्सों में बांटने के कांग्रेस के फैसले ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को बल दिया और अंततः देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को कानूनी रूप दिया है, लेकिन कांग्रेस उसकी अवहेलना कर रही है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि 1937 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग की सरकार बनाने की कोशिश में जिन्ना की शर्त पर वंदे मातरम् रोका गया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वे कानून को नहीं मानते।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार किया। पार्टी नेता भूपेश बघेल ने कहा कि वंदे मातरम् कांग्रेसी गाते थे, लाठियां कांग्रेसियों ने खाईं, जेल कांग्रेसी गए और गोलियां कांग्रेसियों ने खाईं। उन्होंने कहा कि भाजपा बताए कि वंदे मातरम् गाते हुए उसके कौन लोग लाठी या गोली खाए। उन्होंने 1897 में कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा गीत के दो छंद गाए जाने का भी जिक्र किया।
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस से जुड़े सवाल पर टैगोर ने दो छंद रखने की सलाह दी थी क्योंकि भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होगा। उन्होंने कहा कि हम तब भी गाते थे और आज भी गा रहे हैं।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि 1937 का प्रस्ताव संविधान सभा में दो छंद के अनुमोदन से जुड़ा है और अमित शाह खुद को सरदार पटेल, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और डॉ. अंबेडकर से बड़ा मान रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत किसने दी। साथ ही कहा कि जो व्यक्ति 20 दिनों तक संसद से भाग गया था, वह अब खुद को सरदार पटेल से बड़ा बता रहा है।
L. N. Bhargava