भोपाल मेट्रो को नहीं मिल रहे यात्री, समय-सारणी बदली, ट्रिप भी घटाई गई

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भोपाल मेट्रो में यात्रियों की कमी, समय-सारणी और ट्रिप में कटौती

भोपाल मेट्रो में शुरुआत के कुछ ही दिनों में यात्रियों की संख्या उम्मीद से काफी कम रहने लगी है। इसके चलते मेट्रो कॉरपोरेशन ने मेट्रो के संचालन समय में बदलाव करते हुए ट्रिप की संख्या घटाने का निर्णय लिया है। नया शेड्यूल 5 जनवरी से लागू होगा।

उद्घाटन के बाद 14 दिन में तस्वीर बदल गई

भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने किया था। 21 दिसंबर से इसका कमर्शियल रन शुरू हुआ और आम लोगों के लिए मेट्रो सेवा खोल दी गई। शनिवार तक मेट्रो को चलते 14 दिन पूरे हो गए, लेकिन शुरुआती उत्साह के बाद यात्री संख्या तेजी से कम हो गई।

पहले दिन 21 दिसंबर को सबसे अधिक 6568 यात्री मेट्रो में सवार हुए थे। उस दिन टिकट से 2 लाख 5 हजार 350 रुपए की आय हुई थी। इसके बाद रोजाना यात्रियों की संख्या घटती गई और वर्तमान में यह करीब 1000 के आसपास रह गई है।

नई टाइमिंग: सुबह 9 की बजाय दोपहर 12 से शुरुआत

मेट्रो अफसरों के अनुसार कम यात्रियों की वजह से समय और ट्रिप दोनों में बदलाव किया गया है। अब एम्स स्टेशन से मेट्रो सुबह 9 बजे के स्थान पर दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। एम्स से सुभाषनगर के बीच आखिरी मेट्रो शाम 7 बजकर 30 मिनट पर चलेगी, जो 25 मिनट में सुभाषनगर स्टेशन पहुंचेगी।

मेट्रो सेवा अब रात 7 बजकर 55 मिनट तक संचालित होगी। पहले की तरह यात्रियों को 75 मिनट के अंतराल पर ही मेट्रो मिलेगी, यानी एक गाड़ी जाने के बाद दूसरी गाड़ी सवा घंटे बाद मिलेगी।

ट्रिप 17 से घटाकर 13, 13 दिन में 29 हजार यात्री भी नहीं

पहले दोनों ओर मिलाकर कुल 17 ट्रिप चलाई जा रही थीं, जिन्हें घटाकर 13 कर दिया गया है। अब एम्स से सुभाषनगर के बीच 7 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 6 ट्रिप लगाई जाएंगी।

कमर्शियल रन शुरू होने के 13 दिन में कुल मिलाकर 29 हजार यात्री भी नहीं पहुंचे। 22, 23 और 28 दिसंबर को ही यात्री संख्या 2 हजार से अधिक रही। 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी के कारण 4264 लोगों ने मेट्रो में सफर किया। 30 दिसंबर को सबसे कम 967 यात्री मेट्रो में बैठे, जबकि नए साल के पहले दिन 2023 और दूसरे दिन 1065 यात्रियों ने यात्रा की। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर समय और ट्रिप में बदलाव किया गया।

इंदौर मेट्रो से तुलना

इंदौर में 31 मई 2025 को मेट्रो के कमर्शियल रन की शुरुआत हुई थी। वहां पहले ही दिन लगभग 26 हजार यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया। हालांकि शुरुआती 7 दिन इंदौर में मेट्रो यात्रा फ्री थी, जबकि भोपाल में पहले दिन से ही टिकट खरीदने पड़े। इसके बावजूद भोपाल में पहले दिन 6568 यात्रियों ने यात्रा की, लेकिन बाद में उनका ग्राफ लगातार नीचे आता गया।

धीमी रफ्तार और सोशल मीडिया पर सवाल

भोपाल मेट्रो की रफ्तार और यात्रा समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लगभग 1 किलोमीटर से कम दूरी वाले स्टेशनों के बीच जाने में 4 से 5 मिनट लग रहे हैं। 7 किलोमीटर का सफर 25 मिनट में पूरा हो रहा है, जबकि स्टेशन पर प्रवेश से लेकर बाहर निकलने तक में एक घंटे तक का समय लग रहा है।

दैनिक भास्कर ने इस स्थिति पर रियलिटी चेक भी किया, जिसमें डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन तक एक ओर रिपोर्टरों ने मेट्रो से और दूसरी ओर रिपोर्टरों ने साइकिल से यात्रा की। करीब 2 किलोमीटर के इस सफर में मेट्रो को 7 मिनट लगे, जबकि साइकिल से यही दूरी 3 मिनट में पूरी हो गई। मेट्रो की अधिकतम गति 90 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है, लेकिन वास्तविक यात्रा समय को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स और चर्चाएं जारी हैं।

पहले दिन का उत्साह और शुरुआती अनुभव

कमर्शियल रन के पहले दिन रविवार को लोगों ने घूमने-फिरने के लिए मेट्रो में खासा उत्साह दिखाया। सुबह 9 बजे एम्स स्टेशन से सेवा शुरू हुई और दिन भर में कुल 17 ट्रिप चलीं, जिनमें एम्स से सुभाषनगर के बीच 9 और सुभाषनगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल थीं। शाम 5 बजे तक 5 हजार से अधिक लोग मेट्रो में सफर कर चुके थे और आखिरी ट्रिप तक यह आंकड़ा लगभग 6 हजार तक पहुंच गया।

पहले दिन बच्चों की टिकट को लेकर कुछ विवाद की स्थिति भी बनी, लेकिन समग्र रूप से इसे शहर के लिए नई शुरुआत के रूप में देखा गया। बाद के दिनों में यात्रियों की संख्या कम होने से अब कॉरपोरेशन ने संचालन को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए समय और ट्रिप दोनों में बदलाव किया है।

कुल मिलाकर, भोपाल मेट्रो फिलहाल कम सवारियों, धीमी रफ्तार और समय-सारणी में बार-बार बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, जबकि प्रशासन यात्रियों की सुविधा और आर्थिक व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है।

Sachin Saxena