अटेर विधायक हेमंत कटारे ने इस्तीफे पर तोड़ी चुप्पी: 'गंभीर मुद्दों पर चर्चा नहीं होती, चंबल का खून हैं, FIR से नहीं डरते'
बजट सत्र के दौरान उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने वाले अटेर विधायक हेमंत कटारे ने अब अपनी चुप्पी तोड़ी है. कटारे ने कहा कि विधानसभा में गंभीर और जनहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है, इसी पीड़ा के चलते उन्होंने अपने पद से कार्यमुक्त होने की भावना राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर जताई है.
इस्तीफे के पीछे का कारण
कटारे ने स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे का कारण विधानसभा के भीतर की परिस्थितियां हैं. उनका कहना था कि भोपाल का गौमांस मामला या भागीरथपुरा में हुई मौतों का प्रकरण जैसे बड़े और गंभीर विषयों पर सदन में चर्चा नहीं हो पा रही है, जबकि वे इन मुद्दों के लिए पूरी रात जागकर मेहनत करते हैं और तथ्य इकट्ठा करते हैं. इसके अलावा, उन्होंने अपने परिवार और क्षेत्र को पर्याप्त समय न दे पाने को भी इस्तीफे का एक कारण बताया.
दबाव और आरोपों का खंडन
इस्तीफे के पीछे किसी दबाव या कमजोर पड़ने के आरोपों को कटारे ने सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि उनकी आवाज पहले से ज्यादा मजबूती से सदन में गूंजेगी. भाजपा में शामिल होने की अटकलों को भी उन्होंने गलत बताया. केस री-ओपन होने के सवाल पर उन्होंने बेबाकी से कहा कि वे चंबल की मिट्टी से हैं और FIR से डरने वाले नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में और मजबूती से खड़े रहते हैं. उन्होंने कहा कि उनके पिता बदले की भावना से काम नहीं करते थे, लेकिन वे हिसाब-किताब पूरा रखते हैं और भविष्य में जिसने जैसा व्यवहार किया, उसे वैसा जवाब मिलेगा.
आगे की राजनीतिक राह
कटारे ने कहा कि उन्होंने अपने मन की भावना उचित मंच पर रख दी है और पार्टी जो भी निर्णय लेगी, वह उसका सम्मान करेंगे. उन्होंने भाजपा को यह कहते हुए चेताया कि वे खुश न हों, क्योंकि आने वाले समय में उनके भ्रष्टाचार के मुद्दे और ताकत से उठेंगे. कटारे ने अपनी लंबी राजनीतिक उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग उनके परिवार, पार्टी या कार्यकर्ताओं पर हमला कर रहे हैं, उन्हें जवाब मिलेगा. उन्होंने कैमरे पर यह भी कहा कि जितनी ताकत है, उतनी ताकत से विरोध करें, लेकिन भविष्य में उसे झेलने की तैयारी भी रखें.
Lokendra Mishra