नर्मदा में मगरमच्छ छोड़ने पर विवाद: मछुआरों का विरोध
खंडवा के नर्मदानगर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज नर्मदा नदी में मगरमच्छ छोड़ने का कार्यक्रम करेंगे। इस कार्यक्रम के लिए जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 'पुण्य सलिला मां नर्मदा के वाहन मगरमच्छ को मां नर्मदा में बसाने' के संकल्प को आगे बढ़ा रही है। सरकार का मानना है कि नर्मदा नदी मगरमच्छों के आवास के लिए अनुकूल स्थान है।
मछुआरों का विरोध
मछुआरा संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। मछुआरा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सदाशिव भंवरिया ने आरोप लगाया कि मगरमच्छों को छोड़ने से हजारों मछुआरों की जिंदगी खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि मछुआरों के पास बड़ी नावें नहीं हैं, वे छोटी नावों या टायर ट्यूब के सहारे मछलियां पकड़ते हैं। ऐसे में मगरमच्छ उनके लिए खतरा बन सकते हैं।
रोजगार पर असर
फिशरमैन कांग्रेस के अध्यक्ष अश्विनी चौहान ने कहा कि इंदिरा सागर डेम में मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी। मगरमच्छों के कारण नर्मदा स्नान और जीवनयापन पर भी खतरा बढ़ जाएगा। मछुआरा समुदाय ने इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है।
सरकार की दलील
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वन्य जीव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मगरमच्छों को ऐसे स्थान पर छोड़ा जाएगा जहां लोगों को खतरा न हो। सरकार का दावा है कि मगरमच्छ की उपस्थिति नर्मदा नदी की धारा को सशक्त बनाएगी।
Rajesh Agnihotri