राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर भारत की बढ़ती वैश्विक विरासत पहचान
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के संदर्भ में आने वाले वर्षों में चीन, भारत और तुर्किए दुनिया के सबसे समृद्ध देशों की श्रेणी में शामिल होने की ओर बढ़ रहे हैं। स्थायी और अस्थायी दोनों सूचियों को मिलाकर देखें तो भारत तेज़ी से एक महत्वपूर्ण वैश्विक विरासत केंद्र के रूप में उभर रहा है।
ओरछा, मांडू और सतपुड़ा के लिए विश्व धरोहर की तैयारियां
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से ओरछा, मांडू और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए डोजियर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से यूनेस्को को सौंपा जा चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि इन तीनों स्थलों को वर्ष 2027 तक स्थायी विश्व धरोहर का दर्जा मिल सकता है। इससे प्रदेश की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
कई ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल टेंटेटिव सूची में
मध्यप्रदेश के अनेक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों को यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल किया गया है। इनमें भोजपुर मंदिर, भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट, ग्वालियर किला, चंबल घाटी के शैल चित्र, बुरहानपुर का खूनी भंडारा और मंडला का रामगढ़ गोंड किला प्रमुख हैं।
इसके साथ ही जबलपुर, मुरैना और खजुराहो सहित छह चौसठ योगिनी मंदिरों का समूह, मंदसौर का धमनार, मौर्यकालीन मार्गों पर स्थित सम्राट अशोक के शिलालेखों के लिए सीरियल नॉमिनेशन और मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित बुंदेला राजाओं के किले भी इस अस्थायी सूची में शामिल हैं।
पर्यटन उद्योग के लिए बड़ा अवसर
विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर सूची में अधिक भारतीय स्थलों के शामिल होने से देश के पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ होगा। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर भारत की पर्यटन छवि सकारात्मक रूप से मजबूत हुई है।
ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (आईआईटीटीएम) के प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर बरुआ के अनुसार, वर्तमान समय में यूरोप, अफ्रीका और मध्य एशिया के कई क्षेत्रों में सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत के लिए विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने का अच्छा अवसर तैयार हुआ है, जिसे विश्व धरोहर स्थलों की बढ़ती संख्या और भी मजबूती दे सकती है।
निष्कर्ष
ओरछा, मांडू और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व सहित मध्यप्रदेश के कई स्थलों का विश्व धरोहर और टेंटेटिव सूची में शामिल होना न केवल भारत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी नए अवसरों के द्वार खोलेगा। आने वाले वर्षों में इन पहलों का प्रभाव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखाई दे सकता है।
Sachin Saxena