आवारा पशु हादसों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर आवारा पशुओं से होने वाले हादसों पर सख्त रुख अपनाते हुए पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए तंत्र स्थापित करने को कहा है।
मामला
पंजाब के संगरूर में 21 सितंबर 2007 को सड़क पर टहलते समय विजय पर एक आवारा सांड़ ने हमला कर दिया। इससे उसके सिर पर गहरी चोट लगी और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद उसकी पत्नी निशा ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर मुआवजे की मांग की।
हाई कोर्ट की एकलपीठ ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत तय सिद्धांत को लागू करते हुए 29.32 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने फैसला पलट दिया और कहा कि रिट याचिका में मुआवजा नहीं दिया जा सकता। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए कहा कि इतने लंबे समय बाद पीड़ित परिवार को सिविल कोर्ट भेजना न्यायोचित नहीं होगा। कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 15 लाख रुपये मुआवजा चार सप्ताह में देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मौजूदा मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है और इसे भविष्य के लिए नजीर नहीं माना जाएगा।
आवारा पशुओं पर चिंता
कोर्ट ने सड़कों और राजमार्गों पर आवारा पशुओं से होने वाले खतरे को रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा कि देश में 2018 में पशु हमलों में 1130 लोगों की मौत हुई, 2019 में 1425 और 2020 में 1305 मौतें हुईं। कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए तंत्र स्थापित करें।
अन्य निर्देश
कोर्ट ने पशुओं की टैगिंग अनिवार्य करने, टैगिंग और आश्रयों की देखरेख के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने और परित्यक्त पशुओं को अधिकृत आश्रयों में सुरक्षित स्थानांतरित करने की सिफारिश की। कोर्ट ने कहा कि पहले से कम से कम 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पशु कल्याण के लिए समर्पित कानून लागू हैं।
Navjeet Kaur