उज्जैन में रथ से उतारे जाने के बाद महापौर का विरोध टला
मुख्यमंत्री की बैठक और आश्वासन
शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैरवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष, अन्य पदाधिकारियों और महापौर मुकेश टटवाल से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इसके बाद महापौर ने रविवार को डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष प्रस्तावित कार्यक्रम निरस्त कर दिया।
महापौर ने कहा कि उनकी मंशा सिर्फ बाबा साहब को नमन करने की थी और किसी मांग या धरने का आह्वान नहीं किया गया था।
बैरवा समाज के शहर अध्यक्ष सुरेंद्र मरमट ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि समाज की बात सुनी गई और विवाद सुलझाने का आश्वासन दिया गया।
पिछले विवाद और भविष्य की चेतावनियाँ
पहले महापौर ने कल विरोध का ऐलान किया था, 20 सितंबर को सुबह 11 बजे फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास बैठने की बात कही थी।
शुक्रवार रात प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद उमेशनाथ, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा समेत भाजपा के अन्य पदाधिकारी महापौर के बंगले पहुंचे थे और विरोध वापस लेने को कहा था।
कांग्रेस विधायक महेश परमार, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष रवि राय और बैरवा समाज अध्यक्ष सुरेंद्र मरमट भी महापौर से मिलने पहुंचे थे।
बैरवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदयाल बड़ोदिया ने कहा कि महापौर का नाम कार्यक्रम में था और उन्हें रथ पर बुलाया गया था, फिर नीचे उतारा गया और अभद्र व्यवहार हुआ।
उज्जैन में बैरवा समाज की लगभग 90 हजार आबादी और 65 हजार वोटर हैं, और पिछले 25 वर्षों से इस समाज से महापौर बनते आ रहे हैं।
पहले भी विवाद सामने आए हैं, जैसे सवारी के दौरान महाकाल मंदिर जाने से रोका जाना और 10 जनवरी को पत्र लिखकर 25 भस्म आरती परमिशन रोकी गई।
Navjeet Kaur