यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पहुंचे CM मोहन यादव, 85 एकड़ जमीन उपयोग पर मंथन

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यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पहुंचे CM मोहन यादव, 85 एकड़ जमीन उपयोग पर मंथन

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पहुंचे मुख्यमंत्री, 85 एकड़ जमीन के उपयोग पर चर्चा

भोपाल के जेपी नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में शनिवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गैस राहत से जुड़े अधिकारियों से बातचीत की और फैक्ट्री की करीब 85 एकड़ जमीन के भविष्य में उपयोग को लेकर चर्चा की। अधिकारियों के साथ इस जमीन के इस्तेमाल के विभिन्न विकल्पों पर मंथन किया गया।

गैस पीड़ित संगठन मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात

गैस पीड़ित संगठनों के प्रतिनिधि भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी में हैं। संगठन की रचना ढिंगरा ने बताया कि वे 2-3 प्रमुख मुद्दों पर मुख्यमंत्री से बात करना चाहती हैं। उनके अनुसार, कई प्रभावित महिलाओं को अभी भी एक हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन नहीं मिल रही है। इसके अलावा, गैस पीड़ितों के पुनर्वास और स्वास्थ्य से जुड़ी राज्य स्तरीय समिति की बैठक पिछले 11 साल से नहीं हुई है। इन मुद्दों पर वे मुख्यमंत्री से चर्चा करने की योजना बना रहे हैं।

अब भी दफन है जहरीला कचरा, भूजल प्रदूषण का आरोप

फैक्ट्री परिसर से 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा लगभग 40 साल बाद पिछले वर्ष जनवरी में हटाया गया था। यह कचरा 12 कंटेनरों के जरिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पीथमपुर ले जाया गया, जहां लंबे विरोध प्रदर्शनों के बाद इसे जलाया गया। इसके बावजूद गैस पीड़ित संगठन का कहना है कि फैक्ट्री में अब भी हजारों टन जहरीला कचरा दफन है, जिसकी वजह से आसपास की 42 बस्तियों का भूजल प्रदूषित हो चुका है।

भोपाल गैस त्रासदी: दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनियों में एक

भोपाल गैस त्रासदी 2-3 दिसंबर 1984 की रात को हुई थी। उस समय जेपी नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के प्लांट नंबर CK के टैंक नंबर-610 से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था। इस जहरीली गैस ने भोपाल के हजारों परिवारों को तबाह कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस रात शहर में हर तरफ लाशें बिछी थीं और उन्हें उठाने के लिए गाड़ियां कम पड़ गई थीं। चारों ओर चीख-पुकार और घनी धुंध जैसे माहौल में लोगों को एक-दूसरे को पहचानना भी मुश्किल हो गया था।

फैक्ट्री और गैस रिसाव की पृष्ठभूमि

भोपाल में अमेरिका की यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन ने 1969 में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड का प्लांट शुरू किया था। इस फैक्ट्री में मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) और अल्फा नेफ्थॉल के फॉर्मूलेशन से सेविन ब्रांड का कीटनाशक बनाया जाता था। MIC को अत्यंत खतरनाक रसायन माना जाता है। बताया जाता है कि अमेरिका में इसे एक-एक लीटर की स्टील की बोतलों में अन्य देशों को सप्लाई किया जाता था, जबकि भारत में इसे स्टील के कंटेनरों में मंगाया गया।

1978 में फैक्ट्री परिसर में अल्फा नेफ्थॉल बनाने की इकाई और 1979 में MIC बनाने की यूनिट लगाई गई। MIC का स्टोरेज टैंक 610 अपनी क्षमता से अधिक भरा हुआ था। 2 दिसंबर 1984 की रात लगभग 8:30 बजे ठोस अपशिष्ट से भरे पाइपों को पानी से साफ किया जा रहा था। लीक वाल्वों के कारण यह पानी MIC टैंक में घुस गया, जिससे ‘रन अवे रिएक्शन’ शुरू हो गया। इसके परिणामस्वरूप टैंक 610 फट गया और इसमें मौजूद MIC गैस हवा में फैल गई।

मानव हानि और प्रभाव का बढ़ता आंकड़ा

रातभर में गैस के रिसाव से आधिकारिक तौर पर 3828 लोगों की मौत दर्ज की गई। बाद के वर्षों में 2003 तक 15,000 से अधिक मौतों के दावे सामने आए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 30,000 से अधिक लोग हादसे से प्रभावित हुए थे, जबकि बाद में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 5.5 लाख प्रभावित लोगों तक पहुंचने की बात कही गई।

निष्कर्ष: पुरानी त्रासदी, नए सवाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का दौरा और 85 एकड़ जमीन के उपयोग पर चर्चा, भोपाल गैस त्रासदी की विरासत से जुड़े कई पुराने सवालों को फिर सामने लाती है। जहरीले कचरे, भूजल प्रदूषण, पेंशन, पुनर्वास और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर गैस पीड़ित संगठन अब भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह दौरा इन लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में किसी ठोस पहल की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

Ravi Yadav