पासपोर्ट फीस 67 फीसदी बढ़ी, 14 साल बाद नए नियम लागू

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पासपोर्ट फीस 67 फीसदी बढ़ी, 14 साल बाद नए नियम लागू

पासपोर्ट फीस में 14 साल बाद बड़ा बदलाव

सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि पासपोर्ट फीस में हाल ही में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि पिछली बार 2012 में पासपोर्ट फीस बदली गई थी।

नई फीस और नियम

सरकार ने 'पासपोर्ट नियम, 1980' में संशोधन कर पासपोर्ट फीस में बदलाव किया है। 36 पेज वाले सामान्य नए पासपोर्ट के लिए आवेदन शुल्क 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। नए नियम एक जुलाई 2026 से लागू हैं।

मंत्री ने कहा कि अलग-अलग इनपुट और सेवा वितरण की लागत बढ़ने के कारण फीस में बदलाव करना जरूरी हो गया था। पासपोर्ट फीस इससे पहले 1971, 1980, 1993, 2002 और 2012 में बदली गई थी।

सेवाओं में सुधार

सरकार ने बताया कि पासपोर्ट सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अपग्रेडेड पासपोर्ट सेवा प्रोग्राम वर्जन 2.0 और ई-पासपोर्ट जैसे कदम उठाए गए हैं। इससे सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता में सुधार हुआ है।

चाबहार बंदरगाह

अन्य प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए अमेरिका की शर्तों के साथ प्रतिबंधों से छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो गई। सरकार इसके प्रभाव से निपटने के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है।

चाबहार परियोजना अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए कनेक्टिविटी और मध्य एशिया के साथ भारत के व्यापार व आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। भारत सरकार की कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन के जरिये 2018 से बंदरगाह का संचालन कर रही है।

मंत्री ने कहा कि 13 मई 2024 को इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम आर्गनाइज़ेशन के बीच हुए समझौते की शर्तों के तहत भारत ने इस परियोजना के लिए 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर की वित्तीय प्रतिबद्धता पूरी कर ली है।

Bhavanesh Soni